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ब्यावर के लाल का कमाल, 18 की उम्र में बनाया पैसिव सोनार डिसेप्शन सिस्टम, दुश्मन के रडार होंगे फेल

 

राजस्थान के ब्यावर से एक युवा प्रतिभा की उपलब्धि चर्चा में है, जिसने बेहद कम उम्र में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। 18 वर्षीय इस छात्र ने एक “पैसिव सोनार डिसेप्शन सिस्टम” विकसित करने का दावा किया है, जिसे लेकर कहा जा रहा है कि यह तकनीक भविष्य में दुश्मन के रडार और सोनार सिस्टम को चकमा देने में मददगार साबित हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, यह युवा छात्र विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि रखता है और लंबे समय से रक्षा तकनीकों पर काम कर रहा था। उसने अपने स्तर पर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो पानी के अंदर या संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी करने वाले सोनार संकेतों को भ्रमित करने की क्षमता रखता है। हालांकि यह अभी शुरुआती स्तर का प्रोटोटाइप बताया जा रहा है।

इस उपलब्धि को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी उत्साह देखा जा रहा है। शिक्षकों और वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों का कहना है कि इस तरह के नवाचार ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं में बढ़ती वैज्ञानिक रुचि का संकेत हैं। अगर इस तकनीक को सही मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिले तो यह आगे चलकर रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में उपयोगी हो सकती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी सैन्य तकनीक को वास्तविक उपयोग में लाने से पहले लंबी वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और मान्यता प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसलिए यह अभी एक प्रारंभिक इनोवेशन है, जिसे आगे और विकसित करने की जरूरत है।

परिवार और स्थानीय लोग इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। स्कूल और शिक्षण संस्थानों ने भी छात्र की मेहनत और सोच की सराहना की है। उनका कहना है कि सही दिशा और संसाधन मिलने पर ऐसे युवा देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

फिलहाल यह तकनीक चर्चा का विषय बनी हुई है और वैज्ञानिक समुदाय में भी इस तरह के नवाचारों को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। आने वाले समय में यदि इसे अनुसंधान संस्थानों का सहयोग मिलता है, तो यह रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।