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FMGE परीक्षा पास कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा, कूटरचित प्रमाण-पत्र से ‘डॉक्टर’ बनाने वाले गिरोह का एसओजी ने किया भंडाफोड़

 

विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) की स्क्रीनिंग टेस्ट पास कराने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार कर विदेश से एमबीबीएस कर लौटे अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से डॉक्टर बनवा रहा था। इस खुलासे के बाद चिकित्सा शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।

एसओजी अधिकारियों के अनुसार, गिरोह लंबे समय से अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूल रहा था। आरोप है कि आरोपी फर्जी दस्तावेज और कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार कर अभ्यर्थियों को पात्र दिखाते थे, जिससे वे मेडिकल पंजीकरण हासिल कर सकें। इसके बदले उनसे लाखों रुपये लिए जाते थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने सुनियोजित तरीके से नेटवर्क तैयार कर रखा था। इसमें बिचौलिए, दस्तावेज तैयार करने वाले और अन्य सहयोगी शामिल थे। अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया जाता था कि वे बिना परीक्षा पास किए या फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण प्राप्त कर सकते हैं।

एसओजी को गुप्त सूचना मिलने के बाद पूरे मामले की निगरानी शुरू की गई। जांच के दौरान संदिग्ध लेन-देन और दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिससे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद टीम ने छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रिकॉर्ड जब्त किए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि मरीजों की जान से खिलवाड़ भी हैं। बिना वैध योग्यता के डॉक्टर बनना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसओजी अब यह भी जांच कर रही है कि अब तक कितने अभ्यर्थियों को इस तरीके से फायदा पहुंचाया गया और किन-किन जगहों पर उन्होंने पंजीकरण या नौकरी हासिल की। संबंधित संस्थानों और विभागों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

इस खुलासे के बाद चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और सख्ती की जरूरत पर फिर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को चेतावनी दी है कि किसी भी अवैध या शॉर्टकट रास्ते से बचें, अन्यथा कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।