अलवर के सैटेलाइट अस्पताल में 12 घंटे में दो बार छत गिरी, फुटेज में देंखे बड़ा हादसा टला; सरकार ने मांगी रिपोर्ट
अलवर के काला कुआं स्थित राजकीय सैटेलाइट अस्पताल में महज 12 घंटे के भीतर दो बार छत और लेंटर का हिस्सा गिरने से अस्पताल की भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहली घटना में डॉक्टर और महिला मरीज घायल हो गए, जबकि दूसरी घटना के समय कमरा बंद होने से बड़ा हादसा टल गया। लगातार हुई दो घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और भवन की तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
पहली घटना में डॉक्टर और मरीज हुए थे घायल
सोमवार सुबह अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की जांच चल रही थी। इसी दौरान अचानक पंखे के साथ लेंटर और छत का हिस्सा नीचे गिर गया। हादसे में ड्यूटी पर मौजूद एक डॉक्टर और एक महिला मरीज घायल हो गए।घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया गया।
रात में फिर गिरी छत, कमरा बंद होने से बची जानें
पहली घटना के करीब 12 घंटे बाद सोमवार रात करीब 8:30 बजे अस्पताल के एक अन्य कमरे की छत का हिस्सा भी भरभराकर गिर गया।यह कमरा ओपीडी के कमरा नंबर-7 के सामने स्थित है, जहां सामान्य दिनों में डॉक्टर विकास भारद्वाज मरीजों का उपचार करते हैं। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कमरा बंद था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
तेज धमाके की आवाज सुनकर अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचा तो फर्श पर छत का प्लास्टर और लेंटर का हिस्सा बिखरा पड़ा मिला। इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और कमरे को तत्काल सील कर दिया गया।
सरकार ने मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
लगातार दो हादसों के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि भवन की स्थिति का तत्काल आकलन कराया जाए और यदि कहीं भी संरचनात्मक कमजोरी हो तो तुरंत मरम्मत कराई जाए।
पीडब्ल्यूडी को दिए गए कार्रवाई के निर्देश
सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को अस्पताल भवन की तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अस्पताल की सुरक्षा पर उठे सवाल
एक ही दिन में दो बार छत और लेंटर गिरने की घटनाओं ने अस्पताल की भवन सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत का माहौल है।प्रशासन का कहना है कि अस्पताल भवन की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर अन्य कमरों को भी खाली कराया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।