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जयपुर नगर निगम पर लेबर कोर्ट सख्त, रिटायरमेंट लाभों से वेतन कटौती मामले में कमिश्नर से मांगा जवाब; वीडियो में कोर्ट ने कहा- ऐसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए चिंताजनक

 

जयपुर नगर निगम में काम करने वाले एक श्रमिक के वेतन की राशि उसके सेवानिवृत्ति परिलाभों (रिटायरमेंट बेनिफिट्स) से काटने के मामले में लेबर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निगम कमिश्नर से गुरुवार सुबह 11:30 बजे तक जवाब मांगा है।

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जयपुर महानगर द्वितीय के लेबर कोर्ट-1 के न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए नगर निगम के रवैये पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के साथ लोकसेवकों का इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकसेवकों द्वारा आम लोगों के साथ किया जाने वाला ऐसा व्यवहार लोकतंत्र को कमजोर करने वाला है। इससे आम जनता में सरकारी व्यवस्था के प्रति असंतोष पैदा होता है और समाज में अव्यवस्था की स्थिति बनने का खतरा रहता है।

मामला जयपुर नगर निगम में कार्यरत एक श्रमिक से जुड़ा है। आरोप है कि काम के बदले उसे जो वेतन दिया गया था, उसकी राशि बाद में उसके रिटायरमेंट लाभों से काट ली गई। श्रमिक ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किस नियम और आधार पर कर्मचारी को दिए गए वेतन की वसूली उसके सेवानिवृत्ति लाभों से की गई। कोर्ट ने इस मामले में निगम कमिश्नर से जवाब तलब किया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि लोकसेवकों का दायित्व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उनके साथ असंवेदनशील व्यवहार करना।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारी आम नागरिकों और कर्मचारियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करेंगे तो इससे व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित होगा। ऐसे मामलों में प्रशासनिक संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।

लेबर कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजर नगर निगम कमिश्नर की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर है। जवाब के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि श्रमिक के वेतन से जुड़ी कार्रवाई किस आधार पर की गई थी और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

मामले को कर्मचारियों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद नगर निगम प्रशासन पर इस मामले में उचित स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ गया है।