विदेश से MBBS कर लौटे 1000 डॉक्टरों का भविष्य अधर में: वीडियो में जाने रजिस्ट्रेशन अटका, नौकरी और प्रैक्टिस दोनों पर संकट
राजस्थान में विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटे करीब 1,000 डॉक्टरों का भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण ये डॉक्टर न तो सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी कर पा रहे हैं और न ही स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं।
स्थिति यह है कि फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) पिछले कई महीनों से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नियमों को लेकर बने भ्रम के कारण उनका मामला अटका हुआ है।
RMC और NMC के बीच फंसे डॉक्टर
विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर लौटे FMG डॉक्टरों का कहना है कि वे परमानेंट रजिस्ट्रेशन के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। इसके चलते उन्हें बार-बार Rajasthan Medical Council और National Medical Commission के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने सभी आवश्यक परीक्षाएं और इंटर्नशिप पूरी कर ली हैं, फिर भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी उनके करियर को प्रभावित कर रही है। कई उम्मीदवारों को अस्पतालों से नौकरी के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण वे नियुक्ति नहीं ले सके।
18 मार्च के नोटिफिकेशन से बढ़ा भ्रम
जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रेशन में देरी की मुख्य वजह इसी वर्ष 18 मार्च को NMC द्वारा जारी किया गया एक नोटिफिकेशन माना जा रहा है। इस नोटिफिकेशन की कुछ शर्तों और उनके क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं, जिससे राज्यों में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
बताया जा रहा है कि RMC अधिकारियों को भी कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता का इंतजार है। इसी कारण कई आवेदनों पर अंतिम फैसला नहीं लिया जा रहा।
RMC ने क्या कहा?
RMC का कहना है कि नेशनल मेडिकल काउंसिल की गाइडलाइन को लेकर कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत भ्रम की स्थिति बनी हुई है। परिषद के अनुसार, जैसे ही NMC की ओर से आवश्यक स्पष्टीकरण प्राप्त होगा, रजिस्ट्रेशन की लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए ही रजिस्ट्रेशन जारी किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या उत्पन्न न हो।
युवा डॉक्टरों में बढ़ रही चिंता
रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण युवा डॉक्टरों के सामने आर्थिक और पेशेवर दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कई डॉक्टरों ने विदेश में लाखों रुपये खर्च कर मेडिकल शिक्षा प्राप्त की है और अब भारत लौटने के बाद वे अपने करियर की शुरुआत तक नहीं कर पा रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनके प्रशिक्षण, अनुभव और रोजगार के अवसरों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जल्द समाधान की उम्मीद
FMG डॉक्टरों ने NMC और RMC से इस मामले में जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि नियमों की अस्पष्टता का खामियाजा छात्रों और युवा डॉक्टरों को नहीं भुगतना चाहिए।
फिलहाल सभी की नजर NMC की अगली प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण पर टिकी है। यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो राजस्थान में विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर लौटे सैकड़ों डॉक्टरों का पेशेवर भविष्य और अधिक प्रभावित हो सकता है।