×

वोटिंग के बाद शुरू हुई प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी, जयपुर में BJP ने बुलाए उम्मीदवार; अलवर में निर्दलीय प्रत्याशी को लेकर हंगामा

 

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही अब राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। नगर निकायों में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत जुटाने की कवायद के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने उम्मीदवारों को सुरक्षित रखने में जुट गए हैं।जयपुर में भाजपा ने अपने सभी प्रत्याशियों को पार्टी के शहर कार्यालय में बुलाया है। कार्यालय के बाहर विधानसभा क्षेत्रवार बसों की व्यवस्था की गई है। यहां से पार्षद प्रत्याशियों को एक साथ अलग-अलग स्थानों पर ले जाने की तैयारी है।

जयपुर में BJP की बाड़ेबंदी, बसों से भेजे जाएंगे प्रत्याशी

नगर निगम चुनाव में संभावित जोड़-तोड़ को देखते हुए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को एकजुट रखने की रणनीति बनाई है। पार्टी कार्यालय के बाहर खड़ी बसों के जरिए प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा।पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणाम आने तक प्रत्याशियों को साथ रखना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक हलचल का असर न पड़े।

अलवर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में हंगामा

अलवर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को जयपुर के तूंगा स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराया था।बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात भाजपा के पार्षद प्रत्याशी अजय पूनिया, पूर्व पार्षद सतीश खंडेलवाल और निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा के चाचा भगवान मीणा रिसॉर्ट पहुंचे।आरोप है कि यहां से वार्ड नंबर 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा को बाड़ेबंदी से ले जाया गया। इस घटना के बाद रिसॉर्ट में करीब 3 घंटे तक हंगामा चलता रहा।

हालांकि, पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

चित्तौड़गढ़ में BJP प्रत्याशियों का वीडियो वायरल

चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा नगर पालिका में भी भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की है। पार्टी ने चुनाव के बाद 9 सितंबर को ही अपने उम्मीदवारों को शहर से बाहर भेज दिया था।अब उनकी बाड़ेबंदी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें भाजपा प्रत्याशी स्विमिंग पूल में नहाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

बोर्ड बनाने के लिए शुरू हुई जोड़-तोड़ की तैयारी

राजस्थान के निकाय चुनाव में मतदान के बाद अब सभी दलों की नजरें चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन पर हैं। नगर पालिकाओं और नगर निगमों में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को टूटने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संभावित समीकरणों को देखते हुए अपने उम्मीदवारों की निगरानी और संपर्क बनाए रखने में जुटे हैं।