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शहर के पर्यावरण को लेकर कोर्ट ने जताई चिंता, कोर्ट ने कहा- विकास के साथ पर्यावरण-हरियाली का संरक्षण जरूरी, जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
 

 

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में गोचर भूमि के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर के पर्यावरण को लेकर चिंता जताई। खोखरिया के पास गोचर भूमि पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जरूरी बताया।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शहरों में विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। गोचर भूमि का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

याचिका में गोचर भूमि के उपयोग और उस पर एसटीपी प्लांट स्थापित किए जाने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से मामले से जुड़े तथ्य अदालत के सामने रखे गए।

हाईकोर्ट ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर ही योजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। शहरों के विस्तार के साथ हरित क्षेत्र और प्राकृतिक भूमि का संरक्षण भी जरूरी है।गोचर भूमि को पारंपरिक रूप से पशुओं के चरने और सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी जमीनों के संरक्षण को लेकर समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर मांग उठती रही है।

खोखरिया क्षेत्र में एसटीपी प्लांट से जुड़े मामले में कोर्ट ने संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की आगे की सुनवाई में सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना होगा।