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मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद बिगड़ी 7 मरीजों की आंखों की हालत, संक्रमण फैलने से 5 को रातोंरात SMS जयपुर रेफर

 

सरकारी अस्पताल में किए गए मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) ऑपरेशन के बाद मरीजों की तबीयत बिगड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही 7 मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया और उनकी आंखें सफेद पड़ने लगीं। मरीजों की हालत चिंताजनक होने पर 5 मरीजों को बुधवार देर रात तत्काल जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया।

जानकारी के अनुसार सभी मरीजों का हाल ही में सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही समय बाद मरीजों ने आंखों में तेज दर्द, सूजन, धुंधला दिखाई देने और असहनीय परेशानी की शिकायत की। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि कई मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखों का रंग भी सफेद पड़ने लगा।

मरीजों की स्थिति बिगड़ते देख अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह लेने के बाद 5 गंभीर मरीजों को देर रात एंबुलेंस से जयपुर स्थित SMS अस्पताल भेजा गया। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ उनकी आंखों को बचाने और संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटे हैं। शेष मरीजों का भी लगातार चिकित्सकीय निगरानी में इलाज किया जा रहा है।

प्रारंभिक तौर पर संक्रमण के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि संक्रमण ऑपरेशन के दौरान हुआ, उपकरणों की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया में कोई कमी रही या फिर दवाओं अथवा अन्य चिकित्सा सामग्री में किसी प्रकार की गड़बड़ी थी। अस्पताल में उपयोग किए गए ऑपरेशन उपकरण, दवाओं और अन्य सामग्री की भी जांच कराई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन की प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यदि ऑपरेशन के बाद संक्रमण हो जाए तो यह आंखों की रोशनी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे मामलों में समय पर उपचार बेहद जरूरी होता है, ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके।

फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।