×

गुरुद्वारा धन-धन भाई मंझजी का सालाना समागम संपन्न, पंज प्यारों की अगुवाई में निकले नगर कीर्तन में उमड़ी संगत

 

गुरुद्वारा धन-धन भाई मंझजी साहिब में आयोजित सालाना धार्मिक समागम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहरभर से बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। समागम के तहत निकाले गए भव्य नगर कीर्तन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र गुरबाणी और ‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंज उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब में अखंड पाठ और कीर्तन दरबार के साथ हुई। सुबह से ही संगत मत्था टेकने के लिए पहुंचने लगी। गुरबाणी के मधुर स्वर और धार्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद अरदास कर नगर कीर्तन की शुरुआत की गई।

नगर कीर्तन की अगुवाई पंज प्यारों ने की, जो पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर पवित्र निशान साहिब के साथ सबसे आगे चल रहे थे। उनके पीछे सजी-धजी पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान थे। संगत ने पूरे रास्ते फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। कीर्तन जत्थों ने गुरबाणी का गायन किया, वहीं बच्चों और युवाओं ने गतका कला का प्रदर्शन कर शौर्य और परंपरा का संदेश दिया।

नगर कीर्तन गुरुद्वारा परिसर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों से गुजरता हुआ पुनः गुरुद्वारा साहिब पहुंचा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संस्थाओं द्वारा जलपान, शरबत और प्रसाद की व्यवस्था की गई। लोगों ने बढ़-चढ़कर सेवा कर गुरु घर की परंपरा निभाई।

समागम के दौरान लंगर का विशेष आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। सेवा में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि यह सालाना समागम भाई मंझजी की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो त्याग, सेवा और गुरुभक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन सिख समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए प्रशासन भी मुस्तैद रहा। शांतिपूर्ण और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुए इस समागम ने शहर में आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक और यादगार आयोजन बताया।