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नकल पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: हाईटेक निगरानी और सख्त कानून के बीच होगी परीक्षा, 7.70 लाख अभ्यर्थी शामिल

 

राजस्थान में परीक्षाओं के दौरान नकल पर रोक लगाने के लिए इस बार प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए ‘नकल पर सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी कर ली है। राज्य में आयोजित होने वाली बड़ी परीक्षा में करीब 7.70 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिसके लिए सुरक्षा और निगरानी के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

प्रशासन और परीक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार किसी भी प्रकार की अनियमितता या नकल की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक निगरानी सिस्टम, डिजिटल सर्विलांस और सख्त कानूनी प्रावधानों को लागू किया गया है।

🎥 हाईटेक निगरानी से होगी हर गतिविधि पर नजर

इस बार परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह डिजिटल निगरानी के दायरे में लाया गया है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर कमरे और गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाएगी। कई केंद्रों पर जैमर और अन्य तकनीकी उपकरण भी लगाए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक नकल को रोका जा सके।

इसके अलावा फ्लाइंग स्क्वॉड और विशेष निरीक्षण दलों को भी तैनात किया गया है, जो अचानक केंद्रों पर पहुंचकर जांच करेंगे। परीक्षा के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

📚 7.70 लाख अभ्यर्थियों पर कड़ी नजर

इस परीक्षा में लाखों की संख्या में अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं, जिससे प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। सभी परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और अति-संवेदनशील श्रेणियों में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले कड़ी तलाशी की व्यवस्था होगी और पहचान पत्रों की गहन जांच की जाएगी। नकल रोकने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की प्रणाली लागू की गई है।

⚖️ सख्त कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नकल करने या कराने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें परीक्षा रद्द करने से लेकर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने तक के प्रावधान शामिल हैं।

प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे ईमानदारी के साथ परीक्षा दें और किसी भी तरह के अनुचित साधनों का सहारा न लें।

🚨 प्रशासन पूरी तरह अलर्ट

परीक्षा को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला प्रशासन, पुलिस और शिक्षा विभाग के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि इस बार की व्यवस्था पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक सख्त और तकनीकी रूप से उन्नत है।