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अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का ‘सुप्रीम’ फैसला: 10 मार्च तक जवाब, खनन पर ब्रेक

 

भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने खनन और भूमि उपयोग को लेकर 10 मार्च तक जवाब दाखिल करने की डेडलाइन तय की है। साथ ही, अरावली की परिभाषा स्पष्ट होने तक सभी खनन गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अदालत ने राज्यों और संबंधित खनन कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे 10 मार्च तक अपने पक्ष में जवाब दाखिल करें और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अरावली की सीमा और परिभाषा तय होने तक कोई भी नया खनन कार्य या वर्तमान खनन विस्तार नहीं किया जाएगा। यह कदम अरावली की जैव विविधता और जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदेश से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि खनन से जुड़े दावों और विवादों को भी न्यायिक ढांचे में नियंत्रित किया जा सकेगा।

राजस्थान और हरियाणा सहित अरावली क्षेत्र के प्रभावित जिलों में इस आदेश को लेकर प्रशासन और खनन कंपनियों में सतर्कता बढ़ गई है। पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और इसे पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम बता रहे हैं।

अदालत के आदेश के अनुसार 10 मार्च के बाद ही अरावली की कानूनी परिभाषा तय होगी, जिसके बाद खनन और भूमि उपयोग के नियमों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।