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पंचायती राज परिसीमन पर सुप्रीम कोर्ट से झटका, एसएलपी खारिज; 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव का रास्ता साफ

 

राजस्थान के झालावाड़ में जुलाई 2025 में हुए स्कूल हादसे के बाद जर्जर सरकारी स्कूल भवनों का मुद्दा Rajasthan High Court पहुंचा था। इस मामले में सोमवार (16 फरवरी) को फिर सुनवाई हुई। कोर्ट बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर स्वप्रेरित (सुओ मोटू) संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।

मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक कुमार जैन और जस्टिस महेंद्र गोयल की खंडपीठ ने की। अदालत ने राज्य में जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया।

सुनवाई के दौरान स्कूलों के रखरखाव और मरम्मत के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए बजट प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हुई। अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि जर्जर भवनों की पहचान, मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए क्या ठोस योजना बनाई गई है और उसकी प्रगति क्या है।

मामले में National Commission for Protection of Child Rights (एनसीपीसीआर) की ओर से एडवोकेट वागीश सिंह ने पैरवी की। उन्होंने अदालत को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों और जमीनी स्थिति के बारे में अवगत कराया।

खंडपीठ ने संकेत दिया कि बच्चों की जान से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जर्जर भवनों में पढ़ाई तुरंत रोकी जाए और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

यह मामला प्रदेशभर में सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना, सुरक्षा ऑडिट और बजट के प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण बन गया है। अगली सुनवाई में सरकार से प्रगति रिपोर्ट पेश करने की अपेक्षा की जा रही है।