लाडनूं में सुधर्मा सभा लोकार्पण समारोह: सीएम भजनलाल बोले— ‘जीओ और जीने दो’ ही पर्यावरण संरक्षण का मूल मंत्र
जैन विश्व भारती, लाडनूं में आयोजित सुधर्मा सभा लोकार्पण समारोह आध्यात्मिक उल्लास और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिरकत करते हुए जैन दर्शन के मूल सिद्धांत ‘जीओ और जीने दो’ को पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन के संतुलन का आधार बताया।
समारोह के अवसर पर आचार्य महाश्रमण के योगक्षेम वर्ष मंगल प्रवेश को लेकर शहर में दिवाली जैसा माहौल देखने को मिला। जगह-जगह स्वागत द्वार सजाए गए, रोशनी और रंगोली से वातावरण भक्तिमय बन गया। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं और नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। इसमें अहिंसा, करुणा, संयम और सह-अस्तित्व का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, तब ‘जीओ और जीने दो’ का सिद्धांत प्रकृति और मानवता के लिए सबसे बड़ा समाधान है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि समाज जैन दर्शन के सिद्धांतों को अपनाए, तो प्रदूषण, हिंसा और असंतुलन जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जैन विश्व भारती संस्थान की शिक्षा, शोध और आध्यात्मिक गतिविधियों की भी सराहना की।
आचार्य महाश्रमण के योगक्षेम वर्ष मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में वर्षभर विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई। इनमें प्रवचन, ध्यान शिविर, पदयात्राएं, पर्यावरण जागरूकता अभियान और सेवा कार्य शामिल रहेंगे।
समारोह में संत-साध्वियों, समाज के गणमान्य लोगों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। सुधर्मा सभा भवन के लोकार्पण को जैन समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया गया।
पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहरवासियों का कहना है कि इस तरह के आध्यात्मिक आयोजन सामाजिक समरसता और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। लाडनूं में आयोजित यह समारोह धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों के संदेश का भी प्रतीक बन गया।