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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बावजूद आवारा कुत्तों पर नहीं लगाम, नगर परिषद की निष्क्रियता से बढ़ी लोगों की परेशानी

 

शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए लगातार परेशानी का सबब बनती जा रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुद्दे पर सख्त टिप्पणी किए जाने और स्थानीय निकायों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद नगर परिषद की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे आमजन में रोष बढ़ता जा रहा है।

शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। बाजारों, कॉलोनियों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास इनकी संख्या अधिक होने से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। सुबह-शाम टहलने निकलने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खासा खतरा महसूस हो रहा है। कई बार कुत्तों के झुंड राहगीरों पर भौंकते या दौड़ते भी देखे गए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। बावजूद इसके नगर परिषद की ओर से न तो पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है और न ही नसबंदी या टीकाकरण की प्रभावी व्यवस्था की जा रही है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों की समस्या पर चिंता जताते हुए नगर निकायों को जनसुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और स्थानीय प्रशासन को मानवीय तरीके से कुत्तों की संख्या नियंत्रित करनी चाहिए।

इसके बावजूद नगर परिषद की उदासीनता सवाल खड़े कर रही है। कई सामाजिक संगठनों और पार्षदों ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि बाजार क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड के कारण ग्राहक असहज महसूस करते हैं, जिससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। वहीं अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण अभियान प्रभावित हो रहा है, लेकिन जल्द ही विशेष टीम बनाकर नसबंदी और पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। हालांकि, लोगों का कहना है कि यह आश्वासन पहले भी कई बार दिए जा चुके हैं।

फिलहाल शहरवासी प्रशासन से ठोस और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि आवारा कुत्तों की समस्या से राहत मिल सके और आमजन खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।