जयपुर में बोले कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर- 'अपनी बात कहें, लेकिन भाषा संस्कारों के अनुरूप हो'; वीडियो में जाने मुफ्त योजनाओं पर भी रखी राय
प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर ने युवाओं की भाषा, डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लेकर अपनी राय व्यक्त की। सोमवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन शब्दों का चयन मर्यादित और संस्कारों के अनुरूप होना चाहिए। उनका यह बयान दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में आया।
'अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है'
पंडित देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है, लेकिन अभिव्यक्ति की भाषा और शैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने कहा, "अपनी बात कहने का हर किसी को अधिकार है, लेकिन शब्दों का चयन संस्कारों के अनुरूप होना चाहिए।"हालांकि, उन्होंने नई पीढ़ी की कार्यशैली पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा, "Gen-Z का अपना अलग तरीका है, उसके लिए तो मैं कुछ नहीं कह सकता।"
डिजिटल प्लेटफॉर्म के सही इस्तेमाल की सलाह
डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के लिए होना चाहिए, न कि उसके दुरुपयोग के लिए।उन्होंने कहा, "डिजिटल का उपयोग सही तरीके से किया जाना चाहिए। उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।"
मोबाइल गेम्स पर जताई चिंता
बच्चों में मोबाइल और कंप्यूटर गेम्स की बढ़ती लत पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, लगातार स्क्रीन के सामने समय बिताने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि अधिक समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर गेम खेलने से बच्चों की आंखों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और उनका समग्र विकास प्रभावित हो सकता है।
शिक्षा और चिकित्सा को बताया प्राथमिक अधिकार
सरकारी योजनाओं पर अपनी राय रखते हुए पंडित देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा ऐसी मूलभूत सुविधाएं हैं, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान इन दोनों क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर होना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
मुफ्त योजनाओं पर भी रखी राय
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं के अलावा अन्य मुफ्त योजनाओं की आवश्यकता नहीं है। उनका मानना है कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने और बुनियादी सुविधाओं को सशक्त करने पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।उनके इन बयानों के बाद शिक्षा, डिजिटल संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।