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सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने पत्रिका के योगदान को याद किया

 

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने हाल ही में पत्रकारिता के महत्व और अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि उनका नाता कर्पूरचंद कुलिश और पत्रिका से काफी पुराना है। उन्होंने बताया कि जब गांव-ढाणी में कोई अखबार नहीं था और रोजमर्रा की जीवन कठिनाइयों से जूझना पड़ता था, तब भी पत्रिका एक प्रहरी की तरह खड़ी रहती थी।

अरुणा रॉय ने बताया कि उस समय उन्हें सिर पर घड़ा रखकर पानी लाना पड़ता था, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी पत्रिका के माध्यम से उन्हें जानकारी और सामाजिक जागरूकता मिलती थी। उनका कहना है कि अखबार ने ग्रामीण जीवन में सिर्फ समाचार ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का समाज में बड़ा योगदान है। "पत्रिका ने गांव-ढाणी में रहकर भी हमें बाहरी दुनिया से जोड़ा और समाज में उठ रहे मुद्दों पर हमारी नजरें खोलीं," अरुणा रॉय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा।

अरुणा रॉय ने इस अवसर पर कर्पूरचंद कुलिश का भी स्मरण किया और बताया कि उनकी पत्रकारिता ने हमेशा सामाजिक और ग्रामीण मुद्दों को उजागर किया। उनका कहना है कि ऐसे पत्रकार और अखबार समाज में सच और न्याय के प्रहरी के रूप में कार्य करते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण नागरिकों का कहना है कि पत्रकारिता सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि समाज की सुधार प्रक्रिया और जागरूकता में अहम भूमिका निभाती है। पत्रिका ने इसी दिशा में लगातार प्रयास किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर लोगों की समझ बढ़ी है।

अरुणा रॉय ने यह भी बताया कि अखबारों और पत्रकारों ने हमेशा सामाजिक कार्यकर्ताओं के काम को साझा किया और लोगों तक उनके संदेश पहुँचाने में मदद की। उनके अनुसार, यह सहयोग समाज में बदलाव लाने और लोगों को जागरूक करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने भी पत्रिका और उसके पत्रकारों के योगदान को सराहा। उनका कहना था कि ग्रामीण जीवन में सूचना और जागरूकता की कमी को पूरा करने में पत्रिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अरुणा रॉय की बातें इस बात का प्रमाण हैं कि पत्रकारिता और सामाजिक कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। पत्रिका जैसी संस्थाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को जोड़े रखने और उनकी आवाज़ को समाज और प्रशासन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण साबित होती हैं।