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विधानसभा से पारित छह जनहित कानून लागू होने का इंतजार, नियमों के बिना ठंडे बस्ते में

 

राजस्थान विधानसभा से पारित छह महत्वपूर्ण जनहित कानून अभी तक लागू नहीं हो पाए हैं। इन कानूनों में कोचिंग सेंटर नियमन, स्वास्थ्य का अधिकार, गिग वर्कर्स और न्यूनतम आय गारंटी जैसे अहम विषय शामिल हैं। विशेषज्ञों और पूर्व अफसरों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नियम न बनने के कारण इन कानूनों का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, विधानसभा ने पिछले कुछ वर्षों में इन कानूनों को पारित किया था, ताकि सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में सुधार और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। लेकिन, कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश अभी तक तैयार नहीं हुए हैं। इसके कारण कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोचिंग सेंटर नियमन कानून के लागू न होने से शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा है। वहीं, स्वास्थ्य का अधिकार कानून के नियम न बनने से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में समान और न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करना अधर में है।

गिग वर्कर्स और न्यूनतम आय गारंटी कानून का लागू न होना भी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है। इन कानूनों का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों और गिग वर्कर्स के लिए आर्थिक सुरक्षा और न्यूनतम लाभ सुनिश्चित करना था। लेकिन नियम न बनने के कारण लाभार्थियों तक सुविधा नहीं पहुंच रही है।

पूर्व आईएएस और वरिष्ठ अफसरों ने कहा कि यह स्थिति सरकार की प्राथमिकता और नीति निर्धारण में देरी को दर्शाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को जल्द से जल्द नियम तैयार कर कानूनों को जनता के लिए प्रभावी बनाना चाहिए। “कानून बनाना सिर्फ पहला कदम है, उनका पालन और कार्यान्वयन सुनिश्चित करना उससे भी जरूरी है। नियम न बनने से जनता के अधिकार सुरक्षित नहीं रह पाते,” एक पूर्व अफसर ने बताया।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि नियम तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसमें कई विभागों और मंत्रालयों के बीच समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि कानून जनता के लाभ के लिए सक्रिय हो सकें।

सामाजिक और आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जनहित के ऐसे कानून सिर्फ घोषणा या कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव वास्तविक जीवन में महसूस होना चाहिए। नियम और दिशा-निर्देश न बनने से नागरिकों के हक़ और सुरक्षा प्रभावित हो रहे हैं।

राजस्थान में इन छह कानूनों का लागू होना न केवल सामाजिक न्याय और पारदर्शिता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सरकार की जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। नागरिक और हितग्राही इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि नियम बनें और कानून वास्तविक लाभ देने लगें।

सरकार और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने, नियमों को अंतिम रूप देने और जनहित कानूनों को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो कानूनों का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और जनता का भरोसा प्रभावित होगा