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सीतामाता मेले का शुभारंभ: लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना, फुटेज में जानें 15 किमी क्षेत्र में नहीं चलता मोबाइल नेटवर्क

 

सीतामाता अभयारण्य क्षेत्र में ग्राम पंचायत मांड कला और ग्राम पंचायत पाल के तत्वावधान में 14 मई से पारंपरिक सीतामाता मेले का शुभारंभ हो गया है। यह चार दिवसीय धार्मिक आयोजन क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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मेले को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिला कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने मेला स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और संबंधित विभागों के कर्मचारियों को बेहतर सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भीड़ प्रबंधन, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

अनुमान है कि मेले के दौरान प्रतिदिन औसतन एक लाख से अधिक श्रद्धालु सीतामाता मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक मेलजोल का भी बड़ा अवसर बन जाता है।

इस मेले की एक विशेष और चुनौतीपूर्ण बात यह है कि अभयारण्य क्षेत्र के लगभग 15 किलोमीटर दायरे में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से काम नहीं करता, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित रहती है। इसके बावजूद श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं और आस्था के इस स्थल से जुड़ते हैं।

श्रद्धालुओं को बड़ीसादड़ी या प्रतापगढ़ मार्ग से पहुंचने पर कई किलोमीटर तक पैदल यात्रा भी करनी पड़ती है। लगभग 3 से 4 किलोमीटर तक का रास्ता पथरीला और पहाड़ी होने के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पड़ता है, लेकिन आस्था के चलते उनकी भीड़ में कोई कमी नहीं आती।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं जैसे पेयजल, चिकित्सा शिविर और मार्गदर्शन केंद्र स्थापित किए हैं। साथ ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन को भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अलर्ट पर रखा गया है। सीतामाता मेला हर वर्ष आस्था, प्रकृति और परंपरा के अनूठे संगम के रूप में आयोजित होता है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।