कोटा दौरे में कांग्रेस एकजुटता के संकेत: राहुल गांधी की मौजूदगी में गहलोत-पायलट साथ, फुटेज में देंखे मुस्कुराते और बातचीत करते दिखे
कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi के दौरे के दौरान राजस्थान कांग्रेस के दो प्रमुख चेहरे—पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot और पूर्व उपमुख्यमंत्री Sachin Pilot—एक साथ नजर आए, जिससे राजनीतिक हलकों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में तनाव और बयानबाजी की खबरें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन कोटा में हुई इस मुलाकात ने एक अलग संदेश दिया। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक दोनों नेता एक-दूसरे के साथ बातचीत करते और सहजता से समय बिताते नजर आए।
कोटा एयरपोर्ट पर Rahul Gandhi की अगवानी के दौरान गहलोत और पायलट को एक साथ देखा गया, जहां दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। इस दौरान माहौल अपेक्षाकृत हल्का और अनौपचारिक दिखाई दिया, जो हाल के राजनीतिक तनावों से बिल्कुल अलग था।इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं को पास-पास बैठकर चर्चा करते हुए भी देखा गया। कई मौकों पर दोनों नेताओं के बीच मुस्कुराहट और ठहाकों के दृश्य भी सामने आए, जिससे यह संकेत मिला कि कम से कम सार्वजनिक मंच पर मतभेदों को किनारे रखने की कोशिश की जा रही है।
Sachin Pilot ने इस मुलाकात से जुड़ी कुछ तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा की हैं। इन तस्वीरों में वे Ashok Gehlot के साथ बैठे बातचीत करते और मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। इन पोस्ट्स के बाद राजनीतिक विश्लेषकों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या राजस्थान कांग्रेस में सुलह की नई शुरुआत हो रही है।कांग्रेस के भीतर यह समीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से एकजुटता की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई औपचारिक राजनीतिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर दोनों नेताओं की सहजता ने सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक और शिष्टाचार भरा क्षण था या फिर राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत का संकेत।