×

कोटा में गैस सिलेंडर की किल्लत, कोचिंग स्टूडेंट्स के मेस और हॉस्टल परेशान

 

देश की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले कोटा में आज छात्रों के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है। शहर में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत ने कोचिंग स्टूडेंट्स के खाने-पीने के पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। कोचिंग शहर के मेस और हॉस्टलों में गैस की सप्लाई बाधित होने से नाश्ता और खाना पकाने की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।

सूत्रों के अनुसार, कोचिंग के छात्रों की संख्या बड़ी होने के कारण सैंकड़ों छात्रों के लिए रोजाना भोजन तैयार करना जरूरी है। लेकिन गैस सिलेंडर की कमी ने इस प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है। कई मेस और हॉस्टल संचालकों ने अब लकड़ी और कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है, ताकि छात्रों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

छात्रों ने बताया कि नाश्ते और खाने में देरी के कारण उनकी पढ़ाई और समय-सारणी भी प्रभावित हो रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे गर्मी और धुंधली गैस की बदौलत पकाए गए भोजन से संतुष्ट नहीं हैं, और उन्हें अब अनियमित समय पर भोजन उपलब्ध हो रहा है।

हॉस्टल और मेस संचालकों ने प्रशासन से अपील की है कि गैस की आपूर्ति जल्द बहाल की जाए। उनका कहना है कि लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल केवल अस्थायी समाधान है और इससे खाना पकाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोटा जैसे बड़े कोचिंग हब में गैस की निरंतर आपूर्ति बेहद आवश्यक है। गैस की कमी न केवल छात्रों के जीवन में असुविधा पैदा करती है, बल्कि हॉस्टलों और मेस व्यवसायों की संचालन क्षमता को भी प्रभावित करती है।

गैस एजेंसियों ने बताया कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और स्थानीय आपूर्ति की कमी के कारण शहर में सिलेंडरों की संख्या सीमित हो गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही गैस की नियमित आपूर्ति बहाल करने के लिए प्रयास जारी हैं।

स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति का जायजा लिया है और आपूर्ति बहाली के लिए अतिरिक्त गैस सिलेंडर और वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों को असुविधा न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है।

अंततः, कोटा में गैस सिलेंडर की किल्लत ने कोचिंग स्टूडेंट्स के भोजन और हॉस्टल व्यवस्था को प्रभावित किया है। हॉस्टल संचालक और छात्र अब अस्थायी समाधान के सहारे चल रहे हैं, लेकिन प्रशासन और गैस एजेंसियों की तत्काल और व्यवस्थित आपूर्ति ही इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है।