☰
×

अलवर में फुटपाथ से दुकानें हटाने पर रो पड़े दुकानदार, वीडियो में जाने 80 साल की बुजुर्ग बोलीं- गरीब हूं, मत मारो, खुद हटा लूंगी

 

राजस्थान के अलवर शहर में घंटाघर और होपसर्कस के आसपास सड़क किनारे लगी दीये, मोमबत्ती और सजावटी सामान की दुकानों को सोमवार को प्रशासन ने हटवा दिया। करीब 10 घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के बीच महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे रोते-बिलखते नजर आए। कई दुकानदारों ने प्रशासन के सामने हाथ जोड़कर दुकानें नहीं हटाने की गुहार लगाई।

कार्रवाई के दौरान करीब 80 साल की बुजुर्ग महिला भगोती पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गईं। उन्होंने रोते हुए कहा, "अरे गरीब आदमी हूं, मत मारो-मत मारो। मैं खुद हटा लूंगी दुकान।" उन्होंने प्रशासन से कहा कि गरीबों को परेशान किया जा रहा है। उनके मुताबिक, कंपनी बाग के सामने दुकान लगाने के बाद भी दो दिन तक एक रुपये की बिक्री नहीं हुई।

बुजुर्ग महिला बोलीं- सुबह से भूखे-प्यासे हैं

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/IQHskZ7639s?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/IQHskZ7639s/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

कार्रवाई के दौरान एक बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि प्रशासन के कहने पर उन्होंने कंपनी बाग में दुकान लगाकर देख लिया, लेकिन वहां सामान नहीं बिका। महिला ने कहा कि वे सुबह से भूखे-प्यासे हैं और उन्हें रोटी तक नसीब नहीं हुई।उन्होंने पुलिस और प्रशासन के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, "गरीब आदमी हूं, मत मारो-मत मारो।" महिला का कहना था कि परिवार की रोजी-रोटी इन छोटी दुकानों से ही चलती है। दुकान हटने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

महिला बोलीं- हमारे बच्चे भूखे हैं, कहां जाएं?

एक अन्य महिला दुकानदार ने कार्रवाई के दौरान कहा कि उनके बच्चे भूखे हैं और परिवार के सामने खाने का संकट है। उन्होंने दावा किया कि घंटाघर और होपसर्कस के आसपास राजा-महाराजाओं के समय से दुकानें लगती आ रही हैं, लेकिन अब उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।महिला ने प्रशासन से सवाल किया कि जब परिवार का गुजारा इन्हीं दुकानों से होता है, तो वे कहां जाएं। दुकानदारों का कहना था कि त्योहार के समय दीये, मोमबत्तियां और सजावटी सामान बेचकर वे कुछ कमाई की उम्मीद कर रहे थे।

10 साल का बच्चा भी रो पड़ा

प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक 10 साल का बच्चा भी खुद को रोक नहीं पाया और बिलख पड़ा। उसने कहा, "हमने चोरी नहीं की, हमारा परिवार सामान ही तो बेच रहा है।" बच्चे की बात सुनकर वहां मौजूद लोगों का ध्यान उसकी ओर गया।बच्चे के परिवार का कहना था कि वे सड़क किनारे दुकान लगाकर सामान बेचते हैं और इसी कमाई से घर चलाते हैं। दुकान हटने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।

कंपनी बाग में दुकान लगाने पर भी नहीं हुई बिक्री

दुकानदारों ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर उन्होंने कंपनी बाग के सामने दुकानें लगाई थीं, लेकिन वहां ग्राहकों की आवाजाही कम होने के कारण बिक्री नहीं हुई। बुजुर्ग भगोती ने कहा कि दो दिन तक दुकान लगाने के बावजूद एक रुपये का सामान नहीं बिका और परिवार को पूरे दिन खाना तक नहीं मिला।सोमवार को घंटाघर और होपसर्कस के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करीब 10 घंटे चली। इस दौरान दुकानदारों ने अपनी परेशानी और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन से राहत की मांग की। कार्रवाई के दौरान रोते-बिलखते दुकानदारों और बच्चों के दृश्य चर्चा का विषय बने रहे।