राजस्थान निकाय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे, वीडियो में देखें वसुंधरा के गढ़ में कांग्रेस जीती; गहलोत-शेखावत अपना वार्ड भी नहीं बचा पाए
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने प्रदेश की सियासत में कई चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। कई दिग्गज नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में भी भाजपा को झटका लगा है।
निकाय चुनाव के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा उन सीटों की हो रही है, जहां बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने-अपने वार्ड में भी पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। इन नतीजों ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ में कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। झालावाड़ लंबे समय से राजे परिवार की मजबूत राजनीतिक जमीन रहा है, लेकिन इस बार निकाय चुनाव में कांग्रेस ने यहां बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया। इसी तरह टोंक में भी भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। यह इलाका सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र के तौर पर जाना जाता है।
निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी पहली बार बड़ा प्रभाव दिखाया है। बारां में आप ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ दिया। पार्टी ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जहां पहली बार किसी नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत के साथ चेयरमैन बनाने का मौका मिल सकता है। यह राजस्थान में आप की स्थानीय राजनीति में बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है।
राजधानी जयपुर में भाजपा मेयर बनाने के करीब पहुंच गई है। यहां पार्टी के प्रदर्शन ने उसके खेमे में उत्साह बढ़ाया है। हालांकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 36 वार्डों में जीत दर्ज की है। भाजपा को 20 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस 7 वार्डों में जीत के साथ तीसरे स्थान पर रही।
भरतपुर के नतीजे भाजपा के लिए इसलिए भी अहम हैं क्योंकि यहां मेयर बनाने के लिए पार्टी को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बोर्ड गठन से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा अब निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से ही नगर निगम में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली से भी पार्टी के लिए अच्छी खबर नहीं आई। यहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इससे साफ है कि निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और क्षेत्रीय समीकरणों का असर कई जगहों पर बड़े नेताओं के प्रभाव से भी ज्यादा दिखाई दिया है।
10 नगर निगमों के परिणामों में बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। कुल 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 42 वार्डों पर जीत दर्ज की। इस तरह पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए किसी दूसरे दल या निर्दलीय के समर्थन की जरूरत नहीं होगी।
कुल मिलाकर राजस्थान के निकाय चुनावों ने प्रदेश की राजनीति में कई नए समीकरणों के संकेत दिए हैं। कहीं भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आई तो कहीं कांग्रेस ने वापसी की, जबकि निर्दलीयों और आम आदमी पार्टी ने भी कई जगहों पर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। अब निगाहें अध्यक्ष और मेयर पद के चुनाव पर रहेंगी, जहां इन नतीजों के बाद सत्ता के स्थानीय समीकरण और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।