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भीलवाड़ा में अवैध खनन का सनसनीखेज मामला, पुलिस और रसूखदारों पर मिलीभगत के आरोप

 

भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें अवैध खनन को लेकर पुलिस और रसूखदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। मामले में कहा जा रहा है कि लाखों रुपए के अवैध सैंडस्टोन खनन के मुख्य अभियुक्तों को बचाने के लिए स्थानीय पुलिस ने गरीब और बेसहारा अनुसूचित जनजाति के लोगों को झूठे आरोपों में फंसाया।

स्थानीय लोगों और पीड़ितों के अनुसार, इस अवैध खनन में कई रसूखदार लोग शामिल थे। आरोप है कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, जबकि गरीब मजदूरों और छोटे ठेकेदारों को परेशान किया गया। यह मामला न केवल कानून के उल्लंघन को उजागर करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार पैसा और रसूख न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं।

स्थानीय समाजसेवी और पीड़ितों ने कहा कि कई वर्षों से यह खनन अवैध रूप से जारी था। जब शिकायत दर्ज की गई, तब मुख्य अभियुक्तों को बचाने के लिए पुलिस ने जांच में धांधली की। इससे इलाके में आम जनता में गहरा रोष पैदा हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध खनन केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह पर्यावरण और सामाजिक संरचना को भी नुकसान पहुँचाता है। इस मामले में भीलवाड़ा की मिट्टी और जल स्रोतों पर असर पड़ा है। इसके साथ ही छोटे और गरीब श्रमिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, क्योंकि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने कहा कि सभी दोषियों और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने भी जांच में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की मिलीभगत को रोकने के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित किया है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अवैध खनन के मामले में सख्त निगरानी और कानून के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि गरीब और अनुसूचित जनजाति समुदायों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने वाले अधिकारी और अन्य लोग जिम्मेदार ठहराए जाएं।

इस सनसनीखेज मामले ने भीलवाड़ा जिले में अवैध खनन और प्रशासनिक मिलीभगत के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह जरूरी है कि अवैध गतिविधियों में शामिल रसूखदार और बड़े ठेकेदारों के खिलाफ कड़ा कानून प्रवर्तन हो, ताकि आम जनता का विश्वास प्रशासन पर बना रहे।

अंततः, बिजौलियां क्षेत्र का यह मामला अवैध खनन और रसूखदारों की मिलीभगत की गंभीरता को उजागर करता है। अधिकारियों और न्यायालय से उम्मीद की जा रही है कि सभी दोषियों को पकड़कर कानून के अनुसार सजा दी जाएगी और इलाके में निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।