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होली दहन की तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद, आम लोगों से सतर्क रहने की अपील

 

राजस्थान सहित पूरे देश में होली का त्योहार अपनी रंगीनियत और आनंद के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस बार होली दहन (लोहड़ी और होली के पारंपरिक भस्मकांड) को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न धार्मिक विद्वानों और ज्योतिषियों ने समय और तिथि के बारे में अलग-अलग राय दी है, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता में विद्वानों ने जनता से अपील की कि वह सटीक जानकारी और स्थानीय पंचांग के आधार पर ही होली दहन करें। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास और अफवाहों से बचना आवश्यक है। इस अवसर पर धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए सुरक्षा और सामूहिक व्यवस्था पर ध्यान देना भी जरूरी है।

विद्वानों ने यह भी कहा कि विभिन्न मासिक और सौर पंचांगों में समय के भिन्न होने के कारण कभी-कभी होली दहन का सही समय अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न दिखाई देता है। इसलिए किसी भी स्थानिक या पारंपरिक आयोजन में पंचांग की पुष्टि आवश्यक है।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन ने भी इस दिशा में सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आग और धुएं से संबंधित सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए होली दहन करने को कहा गया है। प्रशासन ने आम लोगों से आग्रह किया कि खुले स्थानों और नियंत्रित आग लगाने वाले क्षेत्रों में ही होली दहन किया जाए, ताकि कोई दुर्घटना या आगजनी न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि होली दहन सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय प्रभाव के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आम लोगों को चेताया कि प्लास्टिक और हानिकारक सामग्री का उपयोग बिल्कुल न करें और केवल परंपरागत लकड़ी और सुरक्षित सामग्री का ही प्रयोग करें।

इस बार होली के दहन को लेकर मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर कई अफवाहें फैल रही हैं। विद्वानों ने स्पष्ट किया कि सिर्फ भरोसेमंद स्रोत और पंचांग की जानकारी पर ही लोगों को विश्वास करना चाहिए। किसी भी अनधिकृत या विवादित समय पर उत्सव मनाने से बचना चाहिए।

सामान्यतः होली दहन के दिन सूर्योदय से पूर्व या सूर्यास्त के समय को शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार विद्वानों के मतभेद के कारण सामाजिक और धार्मिक आयोजकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

इस प्रकार, इस वर्ष होली दहन धार्मिक परंपरा, सामूहिक सुरक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संयोजन के साथ मनाना सबसे उचित रहेगा। विद्वानों और प्रशासन दोनों ने जनता से आग्रह किया कि सुरक्षित, पारंपरिक और सही समय पर ही होली दहन आयोजित किया जाए।