राजस्थान के दो IAS अधिकारियों की सैलरी रोकने का आदेश, वीडियो में जाने रिटायर्ड रोडवेज कंडक्टर के बकाया पर 6% ब्याज वसूली के निर्देश
राजस्थान में एक रिटायर्ड रोडवेज कंडक्टर के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में लेबर कोर्ट ने प्रदेश के दो IAS अधिकारियों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किया है। कोर्ट ने तत्कालीन रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा और वर्तमान एमडी पुरुषोत्तम शर्मा का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों से रिटायर्ड कंडक्टर के बकाया भुगतान पर 6 प्रतिशत ब्याज की राशि वसूलने के लिए कहा गया है। लेबर कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने आदेश दिया कि जब तक दोनों अधिकारी निर्धारित ब्याज की राशि जमा नहीं कराते, तब तक उनका वेतन रिलीज नहीं किया जाए। कोर्ट ने मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए श्रम कानूनों के पालन को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की है।
IAS संदीप वर्मा के खिलाफ FIR के आदेश
कोर्ट ने तत्कालीन रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा के खिलाफ श्रम कानूनों की कथित अवहेलना के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने इस मामले की पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए 1 सितंबर की तारीख तय की है।इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश की प्रति केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने DoPT से IAS संदीप वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट को भेजा जाएगा रेफरेंस
मामले में लेबर कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए हाईकोर्ट को रेफरेंस भेजने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट का यह कदम मामले में अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीरता को दर्शाता है।अदालत ने अपने आदेश में श्रमिकों के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी श्रमिक से निर्धारित मजदूरी का भुगतान किए बिना ओवरटाइम काम कराया जाता है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बेगार और जबरन श्रम के समान है।
रिटायर्ड कंडक्टर के भुगतान का मामला
पूरा मामला रोडवेज के एक रिटायर्ड कंडक्टर के बकाया भुगतान से जुड़ा है। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारी को उसका निर्धारित भुगतान नहीं मिला और मामले को लेकर लेबर कोर्ट में विवाद पहुंचा।कोर्ट ने बकाया राशि के साथ उस पर 6 प्रतिशत ब्याज का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अदालत ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए ब्याज की राशि जमा होने तक उनका वेतन रोकने का आदेश दिया है।
1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
लेबर कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई के लिए 1 सितंबर को सुनवाई तय की है। उस दिन संबंधित अधिकारियों और विभाग की ओर से आदेश की पालना रिपोर्ट पेश की जानी है। कोर्ट यह भी देखेगा कि बकाया और ब्याज की राशि जमा करने के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं।अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब मामले में विभागीय कार्रवाई और आपराधिक अवमानना की संभावित कार्यवाही पर भी नजर रहेगी। इस आदेश से सरकारी विभागों में कर्मचारियों और श्रमिकों के भुगतान से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश गया है।