RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा – “समय बड़ा कठिन, एकता और सद्भावना जरूरी”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में वैश्विक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एकता और सद्भावना के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय बड़ा कठिन है और दुनिया के कई हिस्सों में संकट और संघर्ष लगातार बढ़ रहे हैं।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और विश्व आज कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारे समाज में विभाजन और फूट के कारण आक्रमण और तनाव चारों तरफ बढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि अगर समाज एकजुट रहेगा तो इन चुनौतियों का सामना करना आसान होगा।
उन्होंने वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अभी भी जारी है। “यह युद्ध अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अन्य देशों के बीच तनाव और संघर्ष तेज हो गया,” भागवत ने कहा। उन्होंने बताया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भी नई जंग शुरू हो चुकी है, जो वैश्विक शांति के लिए खतरे का संकेत है।
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों में भारत के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है कि समाज में सद्भावना और एकता को मजबूत किया जाए। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से अपील की कि वे आपसी मतभेद भूलकर राष्ट्र और समाज की सेवा में जुटें। उनका कहना था कि एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है, और इसी से आंतरिक और बाहरी संकट का सामना किया जा सकता है।
भागवत ने वैश्विक संघर्षों के संदर्भ में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जटिल हालात हैं, लेकिन भारत को अपने घर और समाज में शांति बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम अलग-अलग मत और विचारों में बंटे रहेंगे तो समाज में अशांति बढ़ेगी और बाहरी ताकतें इसका फायदा उठाएंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोहन भागवत का यह संदेश न केवल राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक संघर्षों के बीच भारत की भूमिका और चेतावनी को भी उजागर करता है। उनका जोर सद्भावना और सामाजिक समरसता पर है, जो वर्तमान समय की जरूरत है।
भागवत ने आगे कहा कि कठिन समय में धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएं और विभाजन और द्वेष से दूर रहें।
इस दौरान उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समान उद्देश्य और एकजुट प्रयास से ही समाज बाहरी संकट और चुनौतियों का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक ताकत को मजबूत बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
मोहन भागवत का यह संदेश राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके विचारों में समय की गंभीरता और समाज में एकजुटता की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है।
इस प्रकार, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने समय की कठिनाईयों के बीच सद्भावना, एकता और सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए सभी नागरिकों से जागरूक रहने और सकारात्मक योगदान देने की अपील की। उनका यह संदेश वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय संकटों के संदर्भ में सामूहिक एकजुटता की महत्ता को रेखांकित करता है।