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RPSC प्राध्यापक हिंदी परीक्षा में डमी कैंडिडेट बनकर बैठा जीजा का साला, फुटेज में देंखे 2 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार

 

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने बड़ी कार्रवाई की है। SOG ने राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्राध्यापक हिंदी प्रतियोगी परीक्षा 2022 में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले एक इनामी आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने जीजा की जगह परीक्षा दी थी और इसके लिए एडमिट कार्ड पर चेहरे की मिक्सिंग कर तैयार की गई फोटो का इस्तेमाल किया गया था। आरोपी पिछले करीब दो साल से फरार चल रहा था।

एडीजी SOG विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान दिनेश कुमार उम्र 36 वर्ष निवासी सांचौर, जालोर के रूप में हुई है। आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था। SOG की टीम ने लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर की ओर से आयोजित प्राध्यापक हिंदी प्रतियोगी परीक्षा 2022 से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आया था कि परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी सैलाराम निवासी रानीवाला, जालोर की जगह दिनेश कुमार डमी कैंडिडेट के तौर पर बैठा था। दिनेश ने अपने जीजा को परीक्षा में पास कराने के उद्देश्य से उसकी जगह परीक्षा दी थी।

SOG की जांच में परीक्षा फर्जीवाड़े का तरीका भी सामने आया। जांच एजेंसी के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते समय दिनेश कुमार ने सैलाराम के साथ अपने चेहरे की मिक्सिंग कर तैयार की गई फोटो का इस्तेमाल किया था। इसके बाद इसी तरह तैयार की गई फोटो को एडमिट कार्ड पर लगाया गया और दिनेश ने सैलाराम की जगह परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर परीक्षा दी।मामले की जांच के दौरान SOG ने परीक्षा केंद्र पर जमा किए गए आवेदन पत्र और ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपलोड की गई तस्वीरों की जांच की। दोनों रिकॉर्ड की तुलना करने पर फोटो में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई और डमी कैंडिडेट के रूप में परीक्षा देने वाले दिनेश कुमार की पहचान की गई।

SOG अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाना प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए गंभीर मामला है। इस तरह की घटनाओं में वास्तविक अभ्यर्थी की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में आरोपी के साथ अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।दिनेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद SOG उससे पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने की योजना कैसे बनाई गई और फोटो में मिक्सिंग किस तरह की गई। इसके अलावा आरोपी और वास्तविक अभ्यर्थी के बीच हुए संपर्क तथा अन्य संभावित लेनदेन की भी जांच की जा सकती है।

आरोपी करीब दो साल से फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। SOG की कार्रवाई को प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़े के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसी लगातार ऐसे मामलों में शामिल आरोपियों की तलाश कर रही है।फिलहाल दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। SOG की जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने की बात अधिकारियों ने कही है।