प्रवासी पक्षियों की वापसी शुरू, सिलोतरा तालाब पर रह गईं छह कुरजां
करीब छह माह पहले सात समंदर पार से सर्द ऋतु के प्रवास पर आई प्रवासी कुरजां (Demoiselle Crane) पक्षियों की अधिकांश टोलियां अब अपने स्वदेश लौटने के लिए उड़ान भर चुकी हैं। हालांकि, इन झुंडों में शामिल छह कुरजां अपने साथियों से बिछुड़कर अब भी पश्चिमी राजस्थान के खेतोलाई गांव स्थित सिलोतरा तालाब पर विचरण करती नजर आ रही हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, कुरजां पक्षी हर वर्ष सर्दियों के मौसम में चीन, मंगोलिया, कजाकिस्तान सहित मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रवास पर आते हैं। राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों और जल स्रोतों के आसपास इन्हें बड़ी संख्या में देखा जाता है, जहां वे कुछ महीनों तक प्रवास के बाद फिर अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं।
आमतौर पर इन प्रवासी पक्षियों की आवक सितंबर माह में शुरू हो जाती है और फरवरी से मार्च के बीच ये अपने गंतव्य की ओर वापसी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं। इस दौरान राजस्थान के तालाब और आर्द्रभूमियां इनके लिए सुरक्षित विश्राम स्थल बनती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सिलोतरा तालाब पर रुकी हुई ये छह कुरजां पिछले कुछ दिनों से वहीं विचरण कर रही हैं और अन्य झुंडों से अलग दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि थकान, दिशा भ्रम या कमजोर शारीरिक स्थिति के कारण कुछ पक्षी समूह से बिछुड़ सकते हैं।
पक्षी प्रेमियों ने इन कुरजाओं की सुरक्षा और देखरेख की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि इन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से भी अपील की गई है कि इन प्रवासी मेहमान पक्षियों की नियमित निगरानी की जाए।
प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि कुरजां पक्षियों का आगमन न केवल जैव विविधता का संकेत है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान की पारिस्थितिकी के संतुलन को भी दर्शाता है। इनका सुरक्षित प्रवास क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
फिलहाल सिलोतरा तालाब पर इन छह कुरजाओं की मौजूदगी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और ग्रामीण इन्हें प्रकृति के अनमोल मेहमान के रूप में देख रहे हैं।