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निकायों की आरक्षण लॉटरी में लगे सांवलिया सेठ के जयकारे, 83 महिलाओं को मिला मौका; जानिए किस वार्ड में कौन सा वर्ग

 

राजस्थान में निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निकायों की आरक्षण लॉटरी के दौरान सांवलिया सेठ के जयकारे भी लगाए गए। लॉटरी में इस बार 83 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिला है। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अलग-अलग इलाकों में संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

लॉटरी के जरिए वार्डों को सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सहित विभिन्न श्रेणियों में आरक्षित किया गया है। आरक्षण तय होने के बाद कई मौजूदा पार्षदों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं।

83 महिलाओं के लिए खुलेगा रास्ता

आरक्षण लॉटरी में महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में वार्ड आरक्षित किए गए हैं। कुल 83 महिलाओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। इनमें सामान्य वर्ग के साथ आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं।

महिला आरक्षण के चलते राजनीतिक दलों को अब कई वार्डों में नए चेहरों पर दांव लगाना पड़ सकता है। वहीं, चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों को अपने लिए नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं।

लॉटरी के दौरान लगाए गए सांवलिया सेठ के जयकारे

आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया के दौरान धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। सांवलिया सेठ के जयकारों के बीच वार्डों का आरक्षण तय किया गया। लॉटरी के नतीजे सामने आने के साथ ही संबंधित वर्ग के संभावित उम्मीदवारों में उत्साह दिखाई दिया।

कई दावेदारों ने अपने वार्ड की आरक्षण श्रेणी सामने आते ही समर्थकों के साथ चुनावी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी।

अब वार्डवार बदलेंगे चुनावी समीकरण

आरक्षण सूची जारी होने के बाद स्थानीय राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि किस इलाके में किस वर्ग का पार्षद चुनाव लड़ सकेगा। आरक्षण के कारण कई वार्डों में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

राजनीतिक दल अब वार्डवार सामाजिक समीकरण, स्थानीय पकड़ और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन करेंगे। वहीं, टिकट की दावेदारी करने वाले नेताओं और उनके समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।

लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निकाय चुनाव की तस्वीर पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है। जिन वार्डों में महिला आरक्षण हुआ है, वहां महिला उम्मीदवारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। वहीं अन्य आरक्षित श्रेणियों में भी संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर संपर्क अभियान शुरू कर सकते हैं।

अब सभी की नजर राजनीतिक दलों की ओर से जारी होने वाली संभावित प्रत्याशियों की सूची पर रहेगी। आरक्षण के बाद बदले समीकरण निकाय चुनाव के परिणामों पर कितना असर डालते हैं, यह चुनाव के दौरान देखने को मिलेगा।