जावर माता मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य शुरू, 5.24 करोड़ की लागत से होगा विकास
जनजाति अंचल में स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र प्राचीन जावर माता मंदिर के जीर्णोद्धार और समग्र विकास कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। लंबे समय से क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के विकास की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने गंभीरता से लेते हुए अमल में लाया है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को 5.24 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। इस महत्वपूर्ण योजना की बजट घोषणा वर्ष 2024-25 में की गई थी।
जनजाति विकास विभाग के माध्यम से इन कार्यों को क्रियान्वित किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर परिसर को न केवल धार्मिक दृष्टि से सशक्त बनाया जाएगा, बल्कि इसे पर्यटन के रूप में भी विकसित करने की योजना है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है, साथ ही क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
परियोजना के अंतर्गत मंदिर के मुख्य गर्भगृह का जीर्णोद्धार, परिसर का सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, पार्किंग सुविधा और सुरक्षित मार्गों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों को भी बेहतर बनाया जाएगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि जावर माता मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके विकास से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र की पहचान भी राज्य स्तर पर और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की योजनाएं जनजातीय अंचलों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में भी इस योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबे समय से मंदिर में बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे अब दूर किया जा रहा है। इससे दर्शन करने आने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ और तय समय सीमा में पूरा किया जाए। साथ ही पर्यावरण और पारंपरिक स्वरूप का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व बरकरार रहे।
कुल मिलाकर, जावर माता मंदिर का यह जीर्णोद्धार और विकास कार्य जनजाति क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात साबित होने वाला है, जो आस्था, पर्यटन और स्थानीय विकास—तीनों को नई दिशा देगा।