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रणथंभौर के राजस्थान की टाइगर फैक्ट्री बनने का किस्सा, कैसे बढ़ती गई बाघों की संख्या

 

रणथंभौर टाइगर रिजर्व राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित देश के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है। यह क्षेत्र बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहां घने जंगलों, झीलों, पहाड़ियों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

रणथंभौर की प्रमुख जानकारी

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  • स्थान: सवाई माधोपुर, राजस्थान
  • प्रसिद्धि: बाघ और वन्यजीव सफारी
  • प्रमुख वन्यजीव: बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, नीलगाय, मगरमच्छ आदि
  • विशेष आकर्षण: रणथंभौर किला, पदम तालाब, राजबाग तालाब और मलिक तालाब
  • राष्ट्रीय उद्यान: 1980 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला
  • टाइगर रिजर्व: प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 1973 में शामिल किया गया था

बाघों की धरती

रणथंभौर की सबसे बड़ी पहचान यहां के रॉयल बंगाल टाइगर हैं। जंगल में खुले इलाकों, तालाबों और पानी के स्रोतों के आसपास बाघों को देखने की संभावना रहती है। कई बाघ अपनी अलग पहचान और व्यवहार के कारण वन्यजीव प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध रहे हैं।

यहां सफारी के दौरान बाघ के अलावा तेंदुआ, स्लॉथ भालू, लकड़बग्घा, जंगली सूअर, सांभर और चीतल जैसे जानवर भी देखे जा सकते हैं। जलाशयों में मगरमच्छ और विभिन्न प्रकार के पक्षी भी पाए जाते हैं।

इतिहास से जुड़ा रणथंभौर किला

रणथंभौर की खासियत केवल वन्यजीव नहीं है। जंगल के बीच पहाड़ी पर स्थित रणथंभौर किला इस क्षेत्र के इतिहास को दर्शाता है। यह किला सदियों पुराने राजपूत इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

किले और जंगल का यह मेल रणथंभौर को राजस्थान के दूसरे वन्यजीव क्षेत्रों से अलग पहचान देता है।

सफारी क्यों है खास?

रणथंभौर में पर्यटक आमतौर पर जीप या कैंटर सफारी के जरिए जंगल का भ्रमण करते हैं। सुबह और शाम की सफारी के दौरान जंगल का वातावरण बेहद आकर्षक दिखाई देता है। हालांकि बाघ वन्यजीव हैं, इसलिए उन्हें देख पाना निश्चित नहीं होता।

रणथंभौर आज वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और राजस्थान की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। बाघों के संरक्षण के साथ-साथ यहां का जंगल सैकड़ों अन्य वन्यजीवों और पक्षियों को भी सुरक्षित आवास प्रदान करता है।