राजस्थान में लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून की मांग, विधायक गोदारा प्रस्ताव लाएंगे
राजस्थान में लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानून बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। चर्चा है कि गुजरात की तर्ज पर विवाह अधिनियम (Marriage Act) में संशोधन किया जाए ताकि इन मामलों पर रोक या नियम बनाए जा सकें। इस संबंध में चूरू जिले के रतनगढ़ विधायक पुसाराम गोदारा ने कहा है कि वे आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में विधायक गोदारा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य समाज में उत्पन्न हो रही विकट परिस्थितियों को रोकना है। उन्होंने कहा, "लव मैरिज और लिव-इन रिलेशन जैसे मामलों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाया जाए। आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर प्रस्ताव लाकर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।"
विधायक ने बताया कि वर्तमान सामाजिक परिस्थिति में अनियंत्रित लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप से परिवार और समाज में कई बार तनाव और विवाद उत्पन्न होते हैं। उनका कहना है कि सदन की इच्छा भी इस दिशा में है कि ऐसे मामलों को नियंत्रित करने के लिए विधिक उपाय किए जाएँ।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रस्ताव सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से विवादास्पद हो सकते हैं। जहां कुछ लोग इसे पारिवारिक और सामाजिक संरचना बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं, वहीं मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पक्षधर इसे निजी जीवन में हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं।
गुजरात की मिसाल का हवाला देते हुए विधायक ने बताया कि वहां विवाह अधिनियम में संशोधन के जरिए लिव-इन रिलेशन और लव मैरिज से जुड़े मामलों पर कानूनी नियंत्रण स्थापित किया गया है। उनका उद्देश्य है कि राजस्थान में भी इस तरह का विधिक प्रावधान लागू हो ताकि विवाद और सामाजिक तनाव कम किया जा सके।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। उन्हें चिंता है कि यदि इस तरह का कानून बनता है तो इसका असर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और युवाओं के जीवन के निर्णयों पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
विधायक गोदारा ने यह भी कहा कि प्रस्ताव लाने से पहले विभिन्न पक्षों की राय ली जाएगी और विधिक विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल समाज में उत्पन्न विकट परिस्थितियों को कम करना है, न कि किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाना।
राजस्थान में इस प्रस्ताव की घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया और जनता के बीच इस विषय पर बहस तेज हो रही है, और आगामी विधानसभा सत्र में इसे लेकर समाज और दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि यह विषय संवेदनशील है और इसके प्रभाव और परिणामों का व्यापक अध्ययन किए बिना कोई भी कानून लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा। वहीं, विधायक गोदारा का मानना है कि कानून और सामाजिक नियम दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।