ईवी अपनाने में राजस्थान पिछड़ा, 7.5% हिस्सेदारी के साथ कई राज्यों से पीछे
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में देशभर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन राजस्थान इस दौड़ में अभी भी पीछे नजर आ रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में ईवी की कुल हिस्सेदारी केवल 7.5 प्रतिशत है, जो कई प्रमुख राज्यों की तुलना में कम है।
रिपोर्ट में सामने आया है कि राजधानी दिल्ली इस मामले में सबसे आगे है, जहां ईवी की हिस्सेदारी 12.7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके बाद केरल 12.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे बड़े औद्योगिक राज्य भी राजस्थान से बेहतर स्थिति में हैं, जहां ईवी की हिस्सेदारी 8.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में ईवी अपनाने की गति अपेक्षाकृत धीमी होने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव और प्रारंभिक लागत को लेकर उपभोक्ताओं की झिझक प्रमुख हैं।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की पहल शामिल है। इसके बावजूद अभी भी ईवी बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं देखी जा रही है।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राजस्थान को ईवी अपनाने के मामले में आगे बढ़ना है, तो सबसे पहले चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करना होगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोगों का भरोसा इस तकनीक पर बढ़ सके।
दूसरी ओर, उपभोक्ताओं का कहना है कि ईवी खरीदने में शुरुआती कीमत अधिक होने और लंबी दूरी के सफर में चार्जिंग की चिंता उन्हें हिचकिचाहट में डालती है। हालांकि ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए धीरे-धीरे लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है।