राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाले में जांच का दायरा बढ़ा, मुकेश पाठक सहित 10 आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। यह घोटाला राज्य की राजनीति में एक बड़ा गबन माना जा रहा है, जिसमें पूर्व मंत्री और आईएएस स्तर के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ चुके हैं। इस मामले में एसीबी, ईडी और सीबीआई की संयुक्त टीम गहन जांच कर रही है।
घोटाले की जांच के तहत मंगलवार को कई स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें प्रमुख आरोपी और चीफ इंजीनियर सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां एसीबी ने इन सभी आरोपियों के लिए 5 दिन की रिमांड मांगी। हालांकि कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड मंजूर की।
इस बीच, मामले का दसवां आरोपी मुकेश पाठक भी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया। मुकेश पाठक पर आरोप है कि उसने घोटाले में फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर अन्य आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन को वैधता का रूप दिया। मुकेश को मंगलवार देर रात गिरफ्तार कर राजस्थान लाया गया।
कोर्ट में पेशी के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि जिन टेंडरों और वर्क ऑर्डरों की बात एसीबी कर रही है, वे कभी संपन्न ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सभी स्तर पर टेंडर और वर्क ऑर्डर सत्यापित और वेरिफाई किए गए थे, इसलिए आरोपियों को तुरंत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राजस्थान में सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। जल जीवन मिशन जैसी राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि जनता के विश्वास और योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि घोटाले के दायरे में पूर्व मंत्री और उच्च अधिकारी आने से यह मामला राजनीतिक हलकों में भी सेंध मार रहा है। यह जांच न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करने की दिशा में है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि राजनीति और प्रशासन में वित्तीय जवाबदेही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
एसीबी की जांच में फर्जी प्रमाण पत्र और टेंडर के दस्तावेज़ मुख्य साक्ष्य बने हुए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धन का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और किस प्रकार भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपी और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह, राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच का विस्तारित दायरा प्रशासन की गंभीर कार्रवाई को दर्शाता है। यह मामला राज्य की राजनीति और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।