राजस्थान हाई कोर्ट सख्त: पंचायत व निकाय चुनाव में देरी पर सरकार और आयोग को अवमानना नोटिस
राजस्थान में ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों के चुनावों में हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर नाराजगी जताते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है और तय समयसीमा का पालन न करने पर जवाब तलब किया है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष ही आदेश दिया था कि प्रदेश में स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव 15 अप्रैल तक हर हाल में कराए जाएं। लेकिन अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्धारित समयसीमा तक चुनाव नहीं कराए जा सके, जिस पर न्यायालय ने गंभीर आपत्ति जताई है।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ द्वारा एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समय पर चुनाव कराना अत्यंत आवश्यक है और इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
⚖️ अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि चुनावों में देरी से लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। लंबे समय तक निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में प्रशासनिक नियंत्रण प्रशासकों के हाथ में चला जाता है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है।
📢 सरकार और आयोग से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर स्पष्ट जवाब मांगा है कि अदालत के आदेश के बावजूद चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि आगे चुनाव कब तक कराए जाएंगे।
🏛️ लोकतंत्र पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों में देरी का सीधा असर स्थानीय विकास कार्यों और जनप्रतिनिधित्व पर पड़ता है। निर्वाचित निकायों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति से जनता की भागीदारी सीमित हो जाती है।
फिलहाल इस मामले ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार और चुनाव आयोग के जवाब पर टिकी हुई हैं, जो आगामी सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करेगा।