×

राजस्थान सरकार का भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त रुख, 24 प्रकरणों का निस्तारण

 

राजस्थान सरकार ने लोक सेवकों के भ्रष्ट और अनुशासनहीन व्यवहार के मामलों में एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर राज्य के विभिन्न विभागों में 24 प्रकरणों का निस्तारण किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और अन्य प्रशासनिक खामियों के मामलों में तीव्र कार्रवाई का आदेश दिया। इसके तहत अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच से जुड़े मामलों में कदम उठाए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों और सूत्रों ने बताया कि कार्रवाई के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों पर सख्त गाज गिराई गई। इसमें उन कर्मचारियों और अधिकारियों को शामिल किया गया जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के प्रमाण या अनुशासनहीनता की शिकायतें आई थीं। न केवल अभियोजन के आदेश जारी किए गए, बल्कि कई मामलों में अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच भी की गई।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोक सेवकों की कार्यशैली और अनुशासन का पालन राज्य प्रशासन की प्रभावशीलता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश दिए कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि लोक सेवकों का कर्तव्य है कि वे जनता के हित में काम करें और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाएँ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राजस्थान सरकार की शासन सुधार और लोक कल्याण नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लगातार भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने से राज्य प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।

राज्य के नागरिकों और कर्मचारियों ने भी इस कार्रवाई को सकारात्मक कदम माना। उनका कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता में कमी आएगी और सरकारी तंत्र अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनेगा।

साथ ही, अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य सरकार भ्रष्ट और अनुशासनहीन लोक सेवकों के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई करती रहेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी विभाग नियमों और कानूनों के तहत काम करें और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरें।

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्त रुख अपनाने की परंपरा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह कार्रवाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे न केवल लोक सेवकों की जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और ईमानदारी भी स्थापित होगी।

इस कार्रवाई के बाद यह संदेश साफ है कि राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी प्रकार की सहनशीलता नहीं दिखाएगी। लोक सेवकों के लिए यह चेतावनी भी है कि वे कर्तव्यों और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क और ईमानदार रहें।