राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव, 10 साल बाद बदले गए शैक्षणिक सत्र और समय
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। शिक्षा विभाग ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए स्कूलों के समय और शैक्षणिक सत्र (Academic Session) में बड़ा बदलाव किया है। यह व्यवस्था पूरे 10 साल बाद बदली गई है और इसका सीधा असर राज्य के करीब 70 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के प्रारंभ और समापन समय में बदलाव किया गया है। इससे पहले सुबह स्कूलों का समय और छुट्टी का समय परंपरागत रूप से निर्धारित था, लेकिन नई नीति के अनुसार समय सारणी को बालकों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और सुविधाओं के हिसाब से संशोधित किया गया है।
शिक्षा विभाग ने बताया कि यह बदलाव शैक्षणिक सत्र की संरचना, पाठ्यक्रम वितरण और परीक्षाओं के समय को भी प्रभावित करेगा। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों को अवकाश और पढ़ाई का संतुलित समय मिले और उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि 10 साल बाद किए गए इस बदलाव का उद्देश्य राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है। इसके तहत विद्यार्थियों को समय पर और व्यवस्थित ढंग से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, अभिभावकों को बच्चों के स्कूल समय और शैक्षणिक गतिविधियों की योजना बनाने में आसानी होगी।
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था सभी जिलों और ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में लागू होगी। विभाग ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे इस बदलाव के अनुसार अपनी तैयारियों को पूरा करें।
अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, इससे स्कूलों में अनावश्यक भीड़भाड़ और समय की दिक्कतें भी कम होंगी।
राजस्थान सरकार के शिक्षा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राज्य के शिक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस बदलाव के परिणामों के आधार पर और सुधार भी किए जा सकते हैं।
अंततः, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र और समय में बदलाव ने करीब 70 लाख विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए शिक्षा की नई दिशा तय कर दी है। 10 साल बाद यह ऐतिहासिक कदम शिक्षा विभाग की दूरदर्शिता और बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।