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राजस्थान पारिवारिक न्यायालय ने ‘मानसिक क्रूरता’ को आधार मानकर तलाक का आदेश दिया

 

राजस्थान के पारिवारिक न्यायालय (प्रथम) ने शुक्रवार को वैवाहिक संबंधों और ‘मानसिक क्रूरता’ के आधार पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। जज आरती भारद्वाज ने एक पति की याचिका को स्वीकार करते हुए 29 अप्रैल 1994 को हुए विवाह को आधिकारिक रूप से समाप्त करने (तलाक) का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर जीवनसाथी केवल कानूनी उलझनों, विवाद और मानसिक प्रताड़ना के जरिए अपने साथी को परेशान करता है, तो इसे ‘मानसिक क्रूरता’ की श्रेणी में रखा जाएगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मानसिक प्रताड़ना भी वैवाहिक जीवन को असहनीय बना सकती है और तलाक का वैध आधार बन सकती है।

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि सतत मानसिक दमन और परेशानियां भी वैवाहिक जीवन को अस्थिर कर सकती हैं। इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया कि अदालत वैवाहिक मानसिक क्रूरता को गंभीरता से लेती है और पीड़ित पक्ष को कानूनी राहत देती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राजस्थान में मानसिक क्रूरता के मामलों में एक मिसाल बन सकता है, क्योंकि यह पारिवारिक अदालतों में मानसिक शोषण को तलाक के वैध आधार के रूप में मान्यता देता है।