राजस्थान शिक्षा विभाग ने कक्षा-5 और कक्षा-8 की परीक्षाओं के लिए जारी किए सात सूत्रीय दिशा-निर्देश
राजस्थान में चल रही प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण-पत्र (कक्षा-8) और प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा-5) परीक्षाओं को लेकर राजस्थान शिक्षा विभाग पूरी तरह सख्त हो गया है। विभाग ने प्रदेश के सभी डाइट प्राचार्यों को इस संदर्भ में सात सूत्रीय अति आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सत्रांक प्रविष्टि, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने सभी प्राचार्यों और परीक्षा नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि वे परीक्षा केंद्रों की तैयारियों, समय पालन और अनुशासन पर कड़ी नजर रखें।
दिशा-निर्देशों में प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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सत्रांक प्रविष्टि की समयबद्धता: सभी छात्रों के सत्रांक को सुनिश्चित और सही ढंग से प्रविष्ट करना अनिवार्य।
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परीक्षा केंद्र की व्यवस्था: कक्षा-5 और कक्षा-8 के लिए निर्धारित परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा, शांति और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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पर्यवेक्षण और निगरानी: प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षक और केंद्राध्यक्ष द्वारा परीक्षा के दौरान अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी।
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मूल्यांकन में सटीकता: उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में त्रुटि नहीं हो और परिणाम निष्पक्ष एवं समय पर तैयार हों।
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तकनीकी और दस्तावेजी तैयारी: ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिकाओं और छात्र डेटा का पूर्ण प्रबंधन।
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विद्यार्थियों की सुविधा: परीक्षा के दौरान सभी छात्रों के लिए आवश्यक सुविधाओं, जैसे पानी, बैठने की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना।
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आपातकालीन प्रबंधन: किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई और विभागीय सूचना सुनिश्चित करना।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य स्तर पर आयोजित ये मूल्यांकन और प्रमाण-पत्र परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता को मापने में मदद करती है।
डाइट प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी शिक्षकों और सहायक स्टाफ को आवश्यक प्रशिक्षण और जागरूकता दें ताकि परीक्षा संचालन के दौरान कोई गड़बड़ी न हो। इसके साथ ही विभाग ने नियमों और अनुशासन का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया है।
राजस्थान शिक्षा विभाग की यह सख्ती इस बात को दर्शाती है कि प्रारंभिक और प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संचालित करना कितना आवश्यक है। साथ ही, यह बच्चों के सीखने और शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्रकार, कक्षा-5 और कक्षा-8 की परीक्षाओं के संचालन में यह दिशा-निर्देश सुनियोजित, पारदर्शी और अनुशासित तरीके से परीक्षा सम्पन्न कराने का मार्गदर्शन करेंगे।