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राजस्थान विधानसभा में तीखा गतिरोध, विधायक श्रवण चौधरी को बोलने से रोके जाने पर विरोध

 

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को तीखा गतिरोध देखने को मिला जब डिमांड पर चर्चा के दौरान विधायक श्रवण चौधरी को बोलने से रोका गया। इस कार्रवाई के बाद सदन में विपक्ष और समर्थक दलों के बीच जोरदार विवाद शुरू हो गया।

सूत्रों के अनुसार, डिमांड पर चर्चा के दौरान श्रवण चौधरी ने कुछ मुद्दों पर बात करना चाही, लेकिन उन्हें सभापति की ओर से बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसे लेकर विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे और सदन की कार्यवाही में अस्थिरता पैदा हो गई।

विपक्ष के नेता ने कहा कि विधानसभा में हर विधायक को अपनी बात रखने का अधिकार है और किसी भी तरह की रोकथाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए सभापति और सरकार पर भी सवाल उठाए।

संसदीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा में इस तरह का गतिरोध आम है, लेकिन इसे सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक नियमों के अनुसार हल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि डिमांड पर चर्चा में बोलने से रोकने का मामला यदि सही कारणों के बिना हुआ है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में असंतुलन पैदा कर सकता है।

सदन में हुई नारेबाजी और हंगामा के बीच कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदन के नियमों के अनुसार कदम उठाए। इसके बाद नेताओं ने शांतिपूर्वक चर्चा जारी रखने का प्रयास किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष और सरकार के बीच संवाद कितना महत्वपूर्ण है। यदि संवाद सही समय और उचित तरीके से न हो, तो विधानसभा में कार्यवाही प्रभावित होती है और जनता के सामने लोकतंत्र की छवि कमजोर पड़ती है।

अंततः, राजस्थान विधानसभा में बुधवार को हुए इस गतिरोध ने लोकतांत्रिक अधिकारों और सदन की कार्यवाही में संतुलन की आवश्यकता को उजागर किया। विधायक श्रवण चौधरी को बोलने से रोके जाने के बाद विपक्ष ने जो विरोध दर्ज कराया, वह सदन में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अहमियत पर ध्यान केंद्रित करने वाला संदेश भी था।