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सोजती गेट के जीर्णोद्धार पर उठे सवाल, अन्य दरवाजों की अनदेखी क्यों?

 

शहर के ऐतिहासिक दरवाजों में शामिल सोजती गेट के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत को एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस प्रमुख प्रवेश द्वार को संवारने के प्रयासों का आमजन और इतिहास प्रेमियों ने स्वागत किया है। हालांकि, इस कार्य के साथ ही एक अहम सवाल भी सामने आया है—क्या बाकी ऐतिहासिक दरवाजों का कोई कसूर है, जो उन्हें अब तक नजरअंदाज किया जा रहा है?

सोजती गेट, जो शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, वर्षों से मरम्मत और संरक्षण की मांग करता रहा है। अब जब यहां जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ है, तो इससे उम्मीद जगी है कि शहर की विरासत को सहेजने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन इसी के साथ नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल एक दरवाजे तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है।

जोधपुर में कई अन्य ऐतिहासिक दरवाजे भी हैं, जिनकी स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। इन दरवाजों की दीवारों पर दरारें, रंग-रोगन का अभाव और संरचनात्मक कमजोरी साफ देखी जा सकती है। इसके बावजूद अब तक उनके संरक्षण के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि अगर प्रशासन वास्तव में शहर की विरासत को बचाने के प्रति गंभीर है, तो सभी दरवाजों के लिए एक समग्र योजना बनानी चाहिए। केवल एक स्थान पर काम शुरू करना सराहनीय जरूर है, लेकिन यह पहल अधूरी तब तक मानी जाएगी जब तक अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को भी समान प्राथमिकता नहीं दी जाती।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी मूल संरचना और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जाना चाहिए।

प्रशासन से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस पहल को व्यापक रूप दे और शहर के सभी ऐतिहासिक दरवाजों के संरक्षण के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करे। तभी जोधपुर की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।