राजस्थान में ट्रांसजेंडर शिशुओं की मौतों के आंकड़ों पर उठे सवाल, किन्नर समुदाय ने जताई हत्या की आशंका
राजस्थान में ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े नवजातों की मौत के आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किन्नर समुदाय ने आशंका जताई है कि कुछ मामलों में ट्रांसजेंडर नवजातों की हत्या की जा सकती है। यह संदेह सरकारी आंकड़ों में दर्ज शिशु मृत्यु दर के असामान्य पैटर्न को देखकर जताया जा रहा है।
नागरिक पंजीकरण एवं मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 से 2025 के बीच राजस्थान में ट्रांसजेंडर समुदाय की कुल 336 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से 59 मौतें ऐसे बच्चों की थीं, जिनकी उम्र एक वर्ष से भी कम थी।
हर छठी ट्रांसजेंडर मौत नवजात की
आंकड़ों के अनुसार, ट्रांसजेंडर समुदाय में दर्ज कुल मौतों में करीब हर छठी मौत नवजात या एक साल से कम उम्र के शिशु की थी। इस अनुपात ने समुदाय और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।
किन्नर समुदाय का कहना है कि नवजातों की इतनी अधिक मौतें सामान्य नहीं लगतीं और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि समाज में आज भी ट्रांसजेंडर बच्चों को लेकर भेदभाव मौजूद है, जिसका असर उनके जीवन पर पड़ सकता है।
2025 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में ट्रांसजेंडर समुदाय के 8 शिशुओं की मौत दर्ज की गई। इन आंकड़ों की तुलना जब सामान्य बच्चों की मृत्यु दर से की गई तो अंतर काफी ज्यादा दिखाई दिया।
2025 में कुल मौतों में एक वर्ष से कम उम्र के लड़कों की हिस्सेदारी करीब 2.94 प्रतिशत और लड़कियों की हिस्सेदारी 2.84 प्रतिशत रही। वहीं, ट्रांसजेंडर समुदाय में एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों का अनुपात करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच गया।
जांच और जागरूकता की मांग
किन्नर समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि अगर किसी भी स्तर पर नवजातों के साथ हिंसा या भेदभाव हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसजेंडर बच्चों से जुड़े स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और परिवार के व्यवहार जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कई बार सामाजिक दबाव और जागरूकता की कमी के कारण ऐसे परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
सरकारी स्तर पर स्पष्टता का इंतजार
फिलहाल इन आंकड़ों को लेकर सरकारी स्तर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आंकड़ों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर मामले की अलग-अलग जांच जरूरी है।
ट्रांसजेंडर समुदाय लंबे समय से समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा की मांग करता रहा है। ऐसे में नवजातों की मौतों से जुड़े ये आंकड़े स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक सोच दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।