श्रीगंगानगर में RDX और हथियारों के खिलाफ ANTF की कार्रवाई पर उठे सवाल, वीडियो में जाने कॉन्स्टेबल पर बदमाशों से मिलीभगत का आरोप
राजस्थान के पाकिस्तान बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी इलाके में 12 अक्टूबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की ओर से RDX और हथियारों के खिलाफ की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। इस मामले में ANTF के ही एक कॉन्स्टेबल पर पंजाब के दो वांछित बदमाशों से मिलीभगत करने का आरोप लगा है। आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने कार्रवाई से पहले बदमाशों को मदद पहुंचाई और पाकिस्तान में बैठे कथित विस्फोटक एवं ड्रग्स डीलर से संपर्क करने के लिए मोबाइल भी उपलब्ध कराया। हालांकि, ANTF के आईजी ने आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।इस मामले में कार्रवाई की टाइमिंग और स्थानीय पुलिस को सूचना देने में हुई देरी भी जांच का अहम पहलू बन गई है। आरोपों के मुताबिक, ANTF की टीम ने बदमाशों को रात करीब साढ़े 9 बजे विस्फोटक के साथ पकड़ लिया था, लेकिन रावला मंडी थाना पुलिस को इसकी आधिकारिक सूचना अगले दिन सुबह करीब 4 बजे दी गई।
ANTF के कॉन्स्टेबल पर बदमाशों को मदद पहुंचाने का आरोप
मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि ANTF का एक कॉन्स्टेबल पंजाब के बदमाशों लखविंदर और सुखविंदर के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि दोनों बदमाशों से उसकी मुलाकात कार्रवाई से पहले ही हो चुकी थी।आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने अपने एक सूत्र के माध्यम से बदमाशों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराया था। इसी मोबाइल के जरिए उन्होंने पाकिस्तान में बैठे कथित विस्फोटक और ड्रग्स डीलर चाचा मिया से संपर्क कर सौदा किया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि कॉन्स्टेबल ने दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कराने के बजाय कथित वांछित तस्कर रघुवीर सिंह की मदद से उन्हें शरण दिलाई। इन आरोपों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कॉन्स्टेबल की भूमिका क्या थी और क्या उसने अपने पद का दुरुपयोग किया।
पंजाब में ग्रेनेड हमले के मामले में फरार थे दोनों बदमाश
लखविंदर और सुखविंदर पंजाब के फाजिल्का थाने पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में फरार बताए जा रहे थे। ऐसे में राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में उनकी मौजूदगी और विस्फोटक के साथ पकड़े जाने का मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।आरोपों के अनुसार, कार्रवाई से पहले ड्रॉपिंग पॉइंट के आसपास एक कार और एक बाइक के जरिए रेकी भी की गई थी। संबंधित कॉन्स्टेबल की गतिविधियां भी इसी इलाके में होने की बात कही जा रही है। अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रेकी किसने की, इसका उद्देश्य क्या था और इसमें किसी पुलिसकर्मी की भूमिका थी या नहीं।
सात घंटे बाद स्थानीय पुलिस को दी गई सूचना
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई के समय और गोपनीयता को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि ANTF की टीम ने रात करीब 9:30 बजे ही दोनों बदमाशों को विस्फोटक के साथ पकड़ लिया था। इसके बावजूद स्थानीय रावला मंडी थाना पुलिस को आधिकारिक सूचना सुबह करीब 4 बजे दी गई।इस तरह सूचना देने में लगभग साढ़े छह घंटे का अंतर रहा। जांच के दौरान यह स्पष्ट करना होगा कि स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई और क्या देरी के पीछे कोई विशेष कारण था।
ANTF आईजी ने आरोपों को बताया गलत
मामले में ANTF के आईजी ने कॉन्स्टेबल पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।फिलहाल, इस मामले में कॉन्स्टेबल की कथित भूमिका, बदमाशों को मोबाइल उपलब्ध कराने के आरोप, रेकी और स्थानीय पुलिस को सूचना देने में देरी जैसे बिंदु जांच के दायरे में हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।