पंजाब-राजस्थान जल विवाद फिर सुर्खियों में, 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग
पंजाब सरकार ने राजस्थान से पानी के उपयोग के बदले बकाया राशि वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मामला 66 साल पुराने जल उपयोग से जुड़ा है, जिसमें पंजाब सरकार ने करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग उठाई है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार (18 मार्च) को इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि राजस्थान द्वारा 1960 से अब तक पानी का उपयोग बिना किसी शुल्क के किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस अवधि के दौरान पंजाब को पानी के उपयोग के बदले रॉयल्टी मिलनी चाहिए थी, जो अब तक नहीं दी गई।
मुख्यमंत्री मान ने इस संदर्भ में 1920 के एक त्रिपक्षीय समझौते का भी हवाला दिया और कहा कि उस समय के नियमों के अनुसार पानी के उपयोग के लिए भुगतान की व्यवस्था थी। उनका आरोप है कि 1960 तक राजस्थान की ओर से भुगतान किया जाता था, लेकिन इसके बाद यह भुगतान बंद कर दिया गया।
इस बयान के बाद जल संसाधनों को लेकर दोनों राज्यों के बीच पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में केंद्र सरकार और संबंधित जल प्राधिकरण की भूमिका अहम होती है, क्योंकि अंतरराज्यीय जल विवादों का समाधान आमतौर पर आपसी सहमति या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
फिलहाल राजस्थान सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले समय में राजनीतिक और कानूनी स्तर पर और भी गरमा सकता है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश में जल संसाधनों के प्रबंधन और उनके न्यायसंगत वितरण को लेकर पहले से ही कई मुद्दे चर्चा में हैं। अब देखना होगा कि इस पर आगे दोनों राज्यों के बीच क्या रुख अपनाया जाता है और इसका समाधान किस दिशा में निकलता है।