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सावरकर से जुड़ा सवाल पूछने पर शिक्षक के निलंबन का विरोध, वीडियो में जाने करौली में शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

 

राजस्थान के करौली जिले में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला इकाई ने केरल के कासरगोड जिले में एक शिक्षक के निलंबन के विरोध में ज्ञापन सौंपा है। महासंघ के पदाधिकारियों ने शिक्षक का निलंबन तत्काल वापस लेने और उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने की मांग की है। यह ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री, केरल के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजा गया है।महासंघ के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार मीना के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि शिक्षक को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित एक प्रश्न पूछने के मामले में निलंबित किया गया है। महासंघ ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए शिक्षक के पक्ष में आवाज उठाई है।

प्रश्न पूछना अपराध नहीं

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महासंघ की ओर से कहा गया कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न पूछना अपने आप में कोई अपराध या अनुशासनहीनता नहीं हो सकता। शिक्षकों को विद्यार्थियों के सामने ऐतिहासिक विषयों पर सवाल पूछने और चर्चा करने का अधिकार होना चाहिए।ज्ञापन में कहा गया कि यदि प्रश्न में किसी तरह की तथ्यात्मक या भाषाई त्रुटि थी, तो शिक्षक को पहले उस गलती को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए था। महासंघ का कहना है कि सीधे निलंबन की कार्रवाई करना उचित नहीं है।

यह मामला केरल के कासरगोड जिले के शिक्षक गुरु प्रसाद से जुड़ा बताया गया है। सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछने के बाद उन्हें निलंबित किए जाने की बात सामने आई थी। इसके विरोध में अब राजस्थान के करौली में भी शिक्षक संगठन ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

सम्मानपूर्वक बहाली की मांग

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रधानमंत्री, केरल के मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि शिक्षक गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लिया जाना चाहिए और उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल किया जाना चाहिए।महासंघ ने अपने ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका और उनके अधिकारों का भी उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि किसी प्रश्न को लेकर यदि विवाद या आपत्ति सामने आती है तो संबंधित शिक्षक को अपना पक्ष रखने और त्रुटि सुधारने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

करौली जिला इकाई की ओर से सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद अब संगठन की नजर केरल सरकार की कार्रवाई पर है। महासंघ ने उम्मीद जताई कि संबंधित शिक्षक के निलंबन पर पुनर्विचार किया जाएगा और उन्हें जल्द सेवा में बहाल किया जाएगा। मामला सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। महासंघ का कहना है कि ऐतिहासिक विषयों पर सवाल पूछने को अनुशासनहीनता मानने के बजाय तथ्यों की जांच और संवाद के जरिए विवाद का समाधान किया जाना चाहिए।