मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव खारिज, वीडियो में देंखे आदिवासी समुदाय में निराशा
केंद्र सरकार ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राजस्थान के साथ-साथ गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय लंबे समय से इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग कर रहे थे।
मानगढ़ धाम को आदिवासी समाज के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी इसका विशेष महत्व है, क्योंकि यहां आदिवासी शहीदों के बलिदान की स्मृति जुड़ी हुई है। इसी कारण आदिवासी संगठनों और समाज के लोगों की ओर से इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग कई वर्षों से की जा रही थी।
इस मुद्दे को संसद में भी उठाया गया। उदयपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद मन्नालाल रावत ने 23 मार्च को लोकसभा में इस विषय पर सवाल किया था। उनके सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट रूप से प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सरकार के इस निर्णय के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (National Monuments Authority) ने वर्ष 2022 में ही अपनी सिफारिशें मंत्रालय को सौंप दी थीं। हालांकि, इन सिफारिशों के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है, जिससे आदिवासी समुदाय में असंतोष की भावना देखी जा रही है।
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से इसके संरक्षण, विकास और पहचान को एक नई दिशा मिल सकती थी। इसके साथ ही पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना थी। लेकिन प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब इस मुद्दे पर आगे की रणनीति को लेकर आदिवासी संगठनों में मंथन शुरू हो गया है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले ने आदिवासी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को एक बड़ा झटका दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और समाज के बीच क्या नया रुख अपनाया जाता है।