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पैरोल पर रिहा बंदियों ने रचाई शादी, अवधि पूरी होते ही लौटे खुली जेल

 

जयपुर में हत्या के मामले में सजा काट रहे दो बंदियों ने पैरोल के दौरान शादी रचाने के बाद बुधवार को निर्धारित अवधि पूरी होते ही दोबारा खुली जेल में वापसी कर ली। पाली की प्रिया सेठ और अलवर जिले के बड़ौदामेव निवासी हनुमान चौधरी ने पैरोल शर्तों का पालन करते हुए समय पर आत्मसमर्पण कर जिम्मेदारी का परिचय दिया।

जानकारी के अनुसार, दोनों बंदी जयपुर की खुली जेल में सजा काट रहे हैं। जेल प्रशासन से विधिवत अनुमति और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें शादी के लिए अस्थायी पैरोल दी गई थी। इस दौरान दोनों ने अपने परिवारजनों की मौजूदगी में विवाह संपन्न किया।

पैरोल की अवधि समाप्त होने पर दोनों बुधवार को स्वयं जेल पहुंच गए। जेल अधिकारियों ने बताया कि दोनों का आचरण पहले से ही संतोषजनक रहा है, जिसके आधार पर उन्हें पैरोल की अनुमति दी गई थी। समय पर लौटने से यह साबित होता है कि उन्होंने नियमों और कानून का सम्मान किया है।

खुली जेल व्यवस्था का उद्देश्य बंदियों को सुधार की दिशा में अवसर देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखना है। इस व्यवस्था के तहत अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को पारिवारिक और सामाजिक कारणों से पैरोल या अवकाश की सुविधा दी जाती है, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ा सकें।

जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों के खिलाफ किसी भी प्रकार की शर्त उल्लंघन की शिकायत नहीं मिली है। शादी के बाद नियमानुसार वे फिर से अपनी सजा पूरी करने के लिए लौट आए हैं।

इस घटनाक्रम को जेल सुधार व्यवस्था की मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है, जहां कैदियों को भी सामाजिक जीवन जीने का अवसर दिया जाता है। वहीं समय पर जेल लौटकर दोनों ने नियमों के प्रति अपनी जवाबदेही भी साबित की है।