एनजीटी की प्रधान पीठ ने रणथंभौर में खनन गतिविधियों पर सुनवाई के लिए पक्षकारों को नोटिस जारी किया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने रणथंभौर क्षेत्र की 208 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन गतिविधियां दोबारा शुरू करने की मांग से जुड़े मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। यह सुनवाई एम.ए. संख्या 10/2026 (मूल आवेदन संख्या 431/2016, बाबू लाल जाजू बनाम भारत संघ एवं अन्य) में हुई।
प्रधान पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की, जबकि विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल भी पीठ में शामिल रहे। सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से वर्ष 2017 में दिए गए आदेश में संशोधन की मांग की गई। आवेदक का तर्क है कि खनन गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय उद्योग और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, साथ ही वन क्षेत्र में संरक्षण और विकास के संतुलन को ध्यान में रखते हुए काम किया जा सकता है।
पीठ ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए संवेदनशीलता और पर्यावरणीय प्रभावों के मामलों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए निर्देश दिए। नोटिस के माध्यम से पक्षकारों को यह अवसर दिया गया कि वे अपने पक्ष और तर्कों को अदालत के सामने प्रस्तुत करें।
विशेषज्ञ सदस्यों ने इस मामले में वन क्षेत्र और जैव विविधता की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 208 हेक्टेयर वन भूमि में खनन से क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए न्यायालय को पर्यावरणीय रिपोर्ट, वन्यजीव प्रभाव अध्ययन और स्थानीय समुदायों की राय पर भी ध्यान देना होगा।
एनजीटी के पर्यावरण न्यायालय में इस प्रकार की सुनवाई का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना है। अदालत ने आवेदक और सरकार प्रतिनिधियों से अपेक्षा जताई कि वे सभी संबंधित आंकड़े, तकनीकी रिपोर्ट और पर्यावरणीय अध्ययन प्रस्तुत करें, ताकि मामले का निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिया जा सके।
इस मामले की सुनवाई से यह संकेत मिलता है कि वन भूमि और खनन गतिविधियों को लेकर विवादों में कानूनी प्रक्रियाओं और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खनन को अनुमति दी जाती है, तो पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन और निगरानी बहुत महत्वपूर्ण होगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सभी पक्षकारों को आदेश दिया कि वे आगामी अगली तारीख तक अपने जवाब और दस्तावेज पेश करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और रिपोर्टों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और निर्णय लिया जाएगा।
इस प्रकार, एनजीटी की प्रधान पीठ ने रणथंभौर क्षेत्र में खनन गतिविधियों के मामले को गंभीरता से लिया है और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया है। इस मामले का निर्णय आने वाले समय में वन संरक्षण, पर्यावरणीय सुरक्षा और स्थानीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।