पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में कल होगा वायु शक्ति-2026, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी हवाई मुआयना
राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना (IAF) का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास 'वायु शक्ति-2026' कल आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय दौरे पर आज जैसलमेर पहुंचेंगी। उनके स्वागत और अगवानी के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू युद्धाभ्यास का हवाई मुआयना करेंगी। 27 फरवरी को वे कॉम्बैट हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान भरेंगी और सीमावर्ती एयरस्पेस में वायुसेना की तैयारियों का निरीक्षण करेंगी। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रपति किसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरेंगी। इससे वायुसेना की क्षमता, आधुनिक तकनीक और तैयारियों को देखने का विशेष अवसर मिलेगा।
इस दौरान राष्ट्रपति वायुसेना स्टेशन पर अधिकारियों और जांबाजों के साथ संवाद भी करेंगी। युद्धाभ्यास के दौरान वायुसेना की 77 फाइटर जेट, 43 हेलिकॉप्टर और 12,000 किलो गोला-बारूद का प्रदर्शन किया जाएगा। यह अभ्यास सेना की सैन्य तैयारी, तकनीकी दक्षता और संयुक्त युद्ध क्षमता को प्रदर्शित करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायु शक्ति-2026 न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत को दिखाने का अवसर है, बल्कि यह सीमावर्ती सुरक्षा और एयरस्पेस नियंत्रण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। युद्धाभ्यास में आधुनिक हवाई रणनीतियों और उपकरणों का उपयोग किया जाएगा, जो देश की सुरक्षा और सामरिक स्थिति को मजबूत बनाएंगे।
इस मौके पर राज्य प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पोकरण और जैसलमेर के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और उड़ान मार्ग की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि सभी कार्यक्रमों को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी योजना बनाई गई है।
राष्ट्रपति के दौरे और युद्धाभ्यास को लेकर नागरिक और मीडिया में भी उत्सुकता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और वायुसेना की तत्परता का संदेश भी देगा।
इस प्रकार, वायु शक्ति-2026 और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा भारतीय वायुसेना की ताकत और आधुनिक सैन्य रणनीति को प्रदर्शित करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। जैसलमेर में यह आयोजन न केवल सैन्य क्षमता की मिसाल बनेगा, बल्कि भारत की सीमावर्ती सुरक्षा की गंभीरता और तत्परता को भी उजागर करेगा।