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बीजेपी के डिस्टर्ब एरिया कानून पर प्रताप सिंह खाचरियावास का बड़ा बयान, सरकार पर लगाया आरोप

 

राजस्थान की बीजेपी सरकार द्वारा लाए जा रहे डिस्टर्ब एरिया कानून को लेकर पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कैबिनेट बैठक में इस बिल को अनुमोदित कर यह साफ कर दिया है कि राजस्थान को अब शांत क्षेत्र नहीं बल्कि अशांत क्षेत्र माना गया है।

खाचरियावास ने आरोप लगाया कि इस तरह के बिल के जरिए सरकार केवल हिंदू-मुस्लिम भावनाओं को भड़काने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, “ऐसा कानून सिर्फ़ राजनीति के लिए बनाया जा रहा है, ताकि समाज में विभाजन पैदा किया जा सके और राजनीतिक फायदे लिए जा सकें। इसके पीछे कोई वास्तविक शांति या कानून व्यवस्था बनाए रखने का मकसद नहीं है।”

पूर्व मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के कुछ नेता खुद उनके पास आए थे और उन्होंने साफ कहा था कि अब पार्टी को प्रचार-प्रसार के लिए उनकी जरूरत नहीं है, क्योंकि संतों की एक पूरी फौज तैयार कर ली गई है। खाचरियावास ने इसे भाजपा की रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम समाज में धार्मिक भावनाओं को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।

राजस्थान में इस बिल पर राजनीति गरमाई हुई है। खाचरियावास के बयान के बाद विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है, क्योंकि इसके चलते किसी भी इलाके को “अशांत” घोषित किया जाना सामाजिक और धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा कर सकता है।

खाचरियावास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह इस बिल के विरोध में आवाज उठाते रहेंगे और इसे जनता के सामने उजागर करेंगे। उनका मानना है कि ऐसे कानून से समाज में विश्वास की कमी और तनाव पैदा होगा और इसे केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए पेश किया गया है।

बीजेपी सरकार ने अभी तक खाचरियावास के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पहले कहा गया था कि यह बिल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अशांत इलाकों में शांति स्थापित करने के लिए है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कानूनों में संतुलन और सावधानी बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि किसी समुदाय या धर्म विशेष के खिलाफ असंवैधानिक प्रभाव न पड़े। यदि इसे सही तरीके से लागू न किया गया, तो यह सामाजिक तनाव और विवादों को और बढ़ा सकता है।

राजस्थान में डिस्टर्ब एरिया कानून पर यह विवाद राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी मोर्चे पर ध्यान खींच रहा है। खाचरियावास का बयान स्पष्ट करता है कि राजनीतिक विरोध और समाज में भावनात्मक विभाजन के मुद्दे आगामी समय में और उभर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बिल पर बहस न केवल विधानसभा में होगी, बल्कि जनता और मीडिया में भी सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से इसकी समीक्षा और आलोचना बढ़ सकती है। इसके चलते सरकार और विपक्ष के बीच आगामी महीनों में सक्रिय टकराव की संभावना बढ़ गई है।